भीख मांगने वाले बच्चे के हाथ अब कम्प्यूटर पर चल रहीं, बच्चे एनीमेशन की दुनिया के सरताज बनने की ओर बढ़ा रहे कदम

 

शिक्षा का प्लेट फार्म मिला तो यूएसए के स्टैम मैथड के तहत कम्प्यूटर पर सीख रहे एनीमेशन
 सड़क पर भीख मांगने गुब्बारे बेचने माता-पिता के साथ मजदूरी करने वाले करीब 50 बच्चों ने कभी स्कूल नहीं देखा। अगर स्कूल गए भी तो उन्हें परिवार की गरीबी ने मजदूरी भीख मांगने पर मजबूर कर दिया और पढ़ाई छूट गई।

मुरादाबाद : सड़क पर भीख मांगने, गुब्बारे बेचने, माता-पिता के साथ मजदूरी करने वाले करीब 50 बच्चों ने कभी स्कूल नहीं देखा। अगर स्कूल गए भी तो उन्हें परिवार की गरीबी ने मजदूरी, भीख मांगने पर मजबूर कर दिया और पढ़ाई छूट गई। ऐसे तमाम बच्चे अब सिर्फ एक अच्छे माहौल में पढ़ ही नहीं रहे बल्कि यूएसए आस्ट्रेलिया के मैथड साइंस टेक्नोलाजी इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स (स्टैम) के तहत सामान्य पढ़ाई से अलग कंप्यूटर में दक्ष हो रहे हैं। मैले कपड़ों में नजर आने वाले यह बच्चे कंप्यूटर पर एनीमेशन सीखकर पढा़ई के साथ अपना करियर सुनहरा बनाने में जुटे हैं। गरीबी में जीने वाले इन 50 बच्चों में अपनी क्रिएटिविटी के बल अलग-अलग क्वालिटी है।

इनमें शकीम व अभिषेक एनीमेशन पर काम कर रहे हैं तो वहीं चार महीने पहले मम्मी के साथ घरों में चौका-बर्तन करने वाली करीब 14 वर्षीय मैनाज और पवन नृत्य में दक्ष हैं। सुबह दस से एक बजे तक पढा़ई करने वाले यह बच्चे नेता जी सुभाषचंद्र बोस सोनकपुर स्टेडियम में एक घंटा टेबिल टेनिस भी खेलने जाते हैं। इनकी निश्शुल्क पढ़ाई, खेल, नृत्य में दक्ष बनाने में परिवर्तन दि चेंज संस्था ने शिक्षा, खेल, नृत्य व अन्य गतिविधियों के लिए अच्छा प्लेट फार्म दिया है।

संस्था से जुड़ी युवा टीम ने इन बच्चों को सड़कों से भीख, मजूदूरी करते देख मां-बाप को विश्वास में लेकर बात की और और रामगंगा विहार स्थित परिवर्तन दि चेंज संस्था के कार्यालय में बनी पाठशाला में चार माह पढ़ाना शुरू किया। सुबह दस से एक बजे तक निश्शुल्क पढ़ रहे इन गरीब परिवारों के बच्चों का अब करियर संवर रहा है, जिससे बच्चों में आगे बढ़ने का हौसला है। बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का बीड़ा इस संस्था ने उठाकर दैनिक जागरण के सात सरोकार में सुशिक्षित समाज का भी संदेश दिया है। ऐसे ही प्रयास से समाज के दबे-कुचले वर्ग के बच्चे शिक्षा, समाज की मुख्य धारा में आएंगे।

अब इस संस्था से जुड़कर तमाम ऐसे युवाओं ने निश्शुल्क पढाने, उनको नृत्य सिखाने और खेलों में क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना, अश्वनी त्यागी ने निपुण बनाने की जिम्मेदारी ली है। अब यह बच्चे पढ़ाई के साथ टेबिल टेनिस,नृत्य, एनीमेशन की बारीकियां सीख चुके हैं। यही नहीं बच्चे दूसरों का सम्मान करना भी अच्छी तरह सीख गए हैं। स्टेडियम की ओर से इन बच्चों को प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा। टेबिल टेनिस में खुशबू और लकी में गजब की प्रतिभा है। बच्चों को पढ़ाने में रिचा जैन, पंकज, वाणी अग्रवाल, अनमोल गुप्ता, नंदनी रस्तोगी निश्शुल्क पढ़ा रहे हैं और दीपांश व अभिषेक बिष्ट सिखाते हैं।

सरोकार सुशिक्षित समाज की राह पर परिवर्तन द चेंज : परिवर्तन द चेंज संस्था के अध्यक्ष कपिल कुमार बताते हैं 2016 से अब तक पांच सालों के सफर में शिक्षा, रक्तदान, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण पर भी जागरूक करने को कई कार्यक्रम चला रहे हैं। कपिल कहते हैं कि दैनिक जागरण के सात सरोकारों से प्रेरणा मिलती है। इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च वेस्ट मेटेरियल और पुराने अखबार दान में लेकर उनको रिसाइकल के लिए कंपनियों को बेचते हैं। इससे इनकी पढ़ाई का खर्च निकलता है। संस्था के महासचिव दीपांशु सैनी कहते हैं कि नई शिक्षा नीति के तहत मलिन बस्तियों के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं। कोरोना काल में भी ई-पाठशाला से झुग्गी झोपड़ी में पढ़ाया। कांशीराम नगर के एफ पाकेट में भी पाठशाला चलती है। जिससे अब तक 100 बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाई के साथ शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं।