बीआरडी मेडिकल कालेज में कहने को दो सौ बेड का सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक, डाक्टर के सिवा कुछ नहीं

 

बीआरडी मेडिकल कालेज का सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक। - फाइल फोटो
बीआरडी मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशियलिटी खुलने के बाद भी गंभीर रोगियों को लखनऊ के लिए रेफर किया जा रहा है। खासकर न्यूरो सर्जरी के रोगियों को। क्योंकि ऐसे मरीजों के लिए अलग आपरेशन थियेटर चाहिए जो नहीं है।

गोरखपुर। भारत सरकार ने बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में 200 बेड का सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक का निर्माण कराया है। ताकि यहां के रोगियों को उपचार के लिए लखनऊ व दिल्ली न जाना पड़े। किसी तरह दो साल बाद इस ब्लाक को सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर तो मिल गए लेकिन इसके अलावा वहां कोई सुविधा नहीं है। अभी तक सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय व स्पीवर के अभाव में मरीजों की भर्ती शुरू नहीं हो पाई है।

शुरू नहीं हो पाई मरीजों की भर्ती, किए जा रहे लखनऊ रेफर

सुपर स्पेशियलिटी खुलने के बाद भी गंभीर रोगियों को लखनऊ के लिए रेफर किया जा रहा है। खासकर न्यूरो सर्जरी के रोगियों को। क्योंकि ऐसे मरीजों के लिए अलग आपरेशन थियेटर चाहिए, जो नहीं है। इनका आपरेशन यदि जनरल सर्जरी के आपरेशन थियेटर में कर दिया जाए, तो मरीज संक्रमण का शिकार हो सकता है और ऐसी स्थिति में उसे बचाना मुश्किल होगा। इसलिए सुपर स्पशियलिटी खुलने के बाद भी गंभीर रोगी दूसरे शहरों में उपचार के लिए जाने को मजबूर हो रहे हैं।

दो सौ में केवल 40 बेड ठीक

दो सौ बेड के अस्पताल में केवल आइसीसीयू के 40 बेड ही काम के हैं। शेष वार्डों में फाल्स सीलिंग का अधिकांश हिस्सा टूट गया है। यदि वहां वार्ड चालू किया जाए तो मरीज के ऊपर फाल्स सीलिंग टूटकर गिर सकती है। बेड भी कबाड़ जैसे दिख रहे हैं।

न्यूरोलाजी लैब में लगा फंगस

न्यूरोलाजी लैब की फाल्स सीलिंग में फंगस लग गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ब्लैक फंगस से मरीज परेशान थे। सुपर स्पेशियलिटी में भी अनेक मरीज ऐसे आते हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा कमजोर होती है। उन्हें फंगस की बीमारी हो सकती है। बावजूद इसके कालेज प्रशासन न तो फंगस की सफाई करवा रहा है और ही फाल्स सीलिंग बदल रहा है।

इंस्टाल नहीं हो पाई मशीनें

हृदय रोग विभाग में कैथ लैब तो लग गई है लेकिन वह चल नहीं रही है। इसके अलावा लिथोट्रिप्सी मशीन (किडनी की पथरी तोड़ने वाली) व माइक्रोस्कोप (दिमाग का ट्यूमर बड़ा करके देखने वाली मशीन) इंस्टाल भी नहीं हो पाई है। इनकी वारंटी मात्र पांच साल है, इसमें से लगभग तीन साल बीत चुके हैं। यदि मशीनें चलतीं और कोई खराबी आती तो इस दौरान वे निश्शुल्क ठीक कराई जा सकती थीं। लेकिन वारंटी समय बीतने के बाद खराब होने पर उन्हें ठीक कराने के लिए धन खर्च करना पड़ेगा।

40 बेड शुरू करने के लिए चाहिए इतने डाक्टर-कर्मचारी

यदि 40 बेड का अस्पताल भी शुरू किया जाए तो छह सीनियर रेजीडेंट, 12 जूनियर रेजीडेंट, 12 स्टाफ नर्स, आठ वार्ड ब्वाय, आठ स्वीपर की जरूरत होगी। अभी सुपर स्पेशियलिटी को वार्ड के लिए कुछ भी नहीं मिल पाया है। केवल ओपीडी के लिए स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय तैनात किए गए हैं।

वेंटीलेटर केवल 39

दो सौ बेड के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में केवल 39 वेंटीलेटर हैं। जबकि सर्वाधिक गंभीर मरीज यहीं पहुंचते हैं। इनमें से भी केवल 30 ही इंस्टाल किए गए हैं। शेष अभी वैसे ही रखे हुए हैं।

कोरोना संक्रमण काल में सुपर स्पेशियलिटी का प्रयोग कोविड वार्ड के रूप में किया गया था। उस दौरान वार्डों में कुछ खराबी आ गई है। उसे ठीक कराने के बाद मरीजों की भर्ती शुरू कर दी जाएगी। हमारे पास पर्याप्त सीनियर व जूनियर रेजीडेंट व अन्य कर्मचारी हैं। अभी वहां केवल ओपीडी चलाई जा रही है। - डा. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कालेज।