बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की जरूरत को देखते हुए केंद्र ने राज्यों को जारी किए विशेष दिशानिर्देश

 

देश में तेजी से बढ़ने लगे हैं कोरोना के मामले (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार के 23 हजार करोड़ रुपये के स्वास्थ्य पैकेज की मदद से देश में सुचारु आक्सीजन आपूर्ति का ढांचा बनकर तैयार है और उसकी आनलाइन मानिटरिंग भी की जा रही है। पूरी दुनिया में ओमिक्रोन वैरिएंट के व्यवहार को देखते हुए टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।

ब्यूरो, नई दिल्ली। सतर्कता डोज के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली वैक्सीन को लेकर स्थिति साफ होती जा रही है। इसके तहत लोगों जिस वैक्सीन का पहले दोनों डोज लिया है, वहीं वैक्सीन सतर्कता डोज के रूप में दी जाएगी। माना जा रहा है कि जल्द की सरकार की ओर इसके लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार सतर्कता डोज के लिए वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा के साथ ही ओमिक्रोन वैरिएंट के कारण उत्पन्न किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश में पूरी तैयारी है। ओमिक्रोन का संक्रमण तेजी से फैलने के कारण बड़ी संख्या में टेस्टिंग की जरूरत को देखते हुए राज्यों को नए दिशानिर्देश भी जारी कर दिये गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार एनटागी, आइसीएमआर और अन्य विशेषज्ञों के साथ पिछले दिनों से चल रही चर्चा में वैक्सीन के सतर्कता डोज की स्थिति साफ हो गई है। वैक्सीन की उपलब्धता और वैज्ञानिक डाटा के आधार पर सतर्कता डोज के रूप में उसी वैक्सीन का इस्तेमाल का फैसला किया गया है, जो पहले दोनों डोज के लिए किया गया था।

तीन जनवरी से 15 से 18 साल के किशोरों की टीकाकरण भी हो रहा शुरू

ध्यान देने की बात है कि 10 जनवरी से हेल्थ केयर वर्कर्स, फ्रंट लाइन वर्कर्स और गंभीर बीमारी से ग्रस्त 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए सतर्कता डोज की शुरूआत होगी। इसके साथ ही तीन जनवरी से 15 से 18 साल के किशोरों की टीकाकरण भी शुरू होगा, जिसमें सिर्फ कोवैक्सीन का इस्तेमाल होगा। उनके अनुसार देश में सतर्कता डोज के लिए पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है और अब भी लगभग 17 करोड़ डोज राज्यों के पास स्टाक में है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वैक्सीन की पर्याप्त संख्या के साथ ही ओमिक्रोन के कारण आने वाली तीसरी लहर से लड़ने के लिए पुख्ता इंतजाम किया गया है। इसके तहत जिला स्तर पर कोरोना के इलाज में लगने वाली दवाइयों का पर्याप्त स्टाक पहले ही रख लिया गया है।

केंद्र सरकार के 23 हजार करोड़ रुपये के स्वास्थ्य पैकेज की मदद से देश में सुचारु आक्सीजन आपूर्ति का ढांचा बनकर तैयार है और उसकी आनलाइन मानिटरिंग भी की जा रही है। पूरी दुनिया में ओमिक्रोन वैरिएंट के व्यवहार को देखते हुए टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।

राज्यों को रैपिट एंटीजन टेस्ट को बढ़ाने को कहा गया

आइसीएमआर के महानिदेशक डाक्टर बलराम भार्गव और स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने संयुक्त पत्र में इसके लिए राज्यों को विशेष दिशानिर्देश जारी कर दिया है। फिलहाल देश में प्रतिदिन 20 लाख से अधिक टेस्ट करने की क्षमता है। राज्यों को इसे बढ़ाने के लिए कहा गया है। लेकिन अचानक बड़ी संख्या में जांच की जरूरत पड़ने पर राज्यों को रैपिट एंटीजन टेस्ट को बढ़ाने को कहा गया है। इसके तहत प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों और अस्तपालों समेत सभी डिस्पेंसरियों को रैपिट एंटीजन टेस्ट की इजाजत दे दी जाएगी।

वहीं, जरूरत पड़ने पर गली-मुहल्लों में भी रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए अस्थायी कैंप लगाए जा सकते हैं। रैपिड एंटीजन टेस्ट के साथ ही देश में घर में टेस्ट करने की सात किट को भी मान्यता मिल चुकी है। राज्यों को इन सभी किट को पर्याप्त मात्रा में खरीदने को कह दिया गया है।