अखिलेश यादव-जयंत चौधरी का राम-लक्ष्मण से जोड़ा रिश्ता, बदलाव की दिखी बयार

 

जनसमूह ने अखिलेश यादव और जयंत चौधरी को राम-लक्ष्मण की जोड़ी बताया।
रालोद में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखी। इससे साफ पता है कि बदलते दौर में सपा और रालोद का गठजोड़ बदलाव को स्वीकार कर चुका है। राम-लक्ष्मण की जोड़ी के माध्मय से सियासी फसल लहलहाने में इन्हें कोई परहेज नहीं है।

अलीगढ़। मंच पर न श्रीराम की तस्वीर थी और न जनसैलाब में जयघोष। मगर, बदलाव की बयार जो दिखी वो चौकाने वाली थी। उमड़े जनसमूह ने अखिलेश यादव और जयंत चौधरी को राम-लक्ष्मण की जोड़ी बताया। रागिनी कलाकारों ने जब मंच पर गीत के माध्यम से दोनों नेताओं को राम-लक्ष्मण की जोड़ी के रूप में प्रस्तुति किया तो सपा-रालोद कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। मंचों से कभी श्रीराम का जयघोष न लगाने वाले समाजवादी पार्टी के नेता भी सहज दिखे। रालोद में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखी। इससे साफ पता है कि बदलते दौर में सपा और रालोद का गठजोड़ बदलाव को स्वीकार कर चुका है। राम-लक्ष्मण की जोड़ी के माध्मय से सियासी फसल लहलहाने में इन्हें कोई परहेज नहीं है।

रैली में धार्मिक नारेबाजी

अयोध्या में 1990 में रामभक्तों पर गोलियां बरसाए जाने के बाद से सपा लंबे समय तक सवालों के घेरे में रही। भाजपा नेता आज भी हर मंच से यह कहने से नहीं चूकते हैं कि सपा के शासनकाल में रामभक्तों पर गोली चली थी। पूरे माहौल में यह बात गूंजने लगी थी कि सपा का राम से किनारा है। इसलिए सपा के मंचों पर कभी जयश्रीराम के नारे नहीं गूंजे। मगर, अब सपा में बदलाव देखा जा रहा है। राम-कृष्ण से परहेज नहीं, बल्कि उनके नाम से जनता को लुभाने का प्रयास भी होने लगा है। हाल ही में रायबरेली में हुई रैली में अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के अवतार में दिखाया गया था। हालांकि, इससे विवाद उपजा था। मगर, गुरुवार को इगलास में सपा-रालोद की रैली में अखिलेश-जयंत की जोड़ी, राम-लक्ष्मण की जोड़ी बताई गई। रैली में बकायदा पोस्टर भी बांटा गया। पोस्टर में दिखाया गया कि राम-लक्ष्मण की जोड़ी असुरों का संहार करेगी। असुर कौन हैं इसके बारे में नहीं दिया गया। यह पोस्टर सपोर्ट इंडिया के अध्यक्ष सुरेश चंद्र सैनी की ओर से बंटवाया गया था। रसिया कलाकार ने गीत सुनाया-जयंत और अखिलेश की राम-लखन की जोड़ी, पर सपा और रालोद के कार्यकर्ताओं ने खूब उत्साह दिखाया। अमूमन ऐसे शब्द आने पर सपा के दिग्गज नेता भी सतर्क हो जाया करते थे, कलाकारों को भी रोक दिया जाता था, मगर रैली में नजारा बदला हुआ था। इससे यह माना जा रहा है कि भाजपा अयोध्या और काशी को लेकर चुनाव में जोश भरेगी तो सपा और रालोद, अपने नेताअों को राम-लक्षमण की जोड़ी के रूप में और धार दे सकती है। हालांकि, इसे दोनों दल कितना भुना सकते हैं, यह आने वाला समय बताएगा।

भारत माता और वंदेमातरम के नहीं गूंजे नारे

राम-लक्ष्मण से नजदीकियां भले ही बनाई जा रही हों, मगर रैली में भारत माता और वंदेमातरम के नारे नहीं गूंजे। मंच से किसी नेता ने जयघोष नहीं किया। रैली में आए कार्यकर्ताओं की जुबां पर ये नारे नहीं आए। अखिलेश और जयंत के ही नारे गूंजते रहे।