जिद पूरी करने के लिए रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर क्या सोचते हैं दिल्ली के लोग, पढ़िये- पूरी स्टोरी

 

जिद पूरी करने के लिए रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर क्या सोचते हैं दिल्ली के लोग, पढ़िये- पूरी स्टोरी
 क्या लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन करने के लिए प्रदर्शनकारियों को दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थान मुहैया कराया जाना चाहिए? इस पर 98 फीसद लोगों ने कहा है कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली। जिद पूरी करानी है तो रास्ते बाधित करके बैठ जाइए। वहीं जिद का ठिकाना जमा लीजिए। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे प्रदर्शनकारियों ने यही तो किया। जिद पूरी कराकर ही उठे। इतना ही नहीं, कानूनों को वापस लेने के बाद भी प्रदर्शनकारियों का मन बढ़ता गया। मांगों की सूची लंबी होती गई। केंद्र सरकार ने एक बार कानून वापसी का निर्णय लिया तो सभी मांगों को मानती ही चली गई। वजह जो हो। लेकिन एक साल में इससे आर्थिक, मानसिक नुकसान तो जनता का ही हुआ। रोजगार छूटे, समय की बर्बादी हुई, उद्योग-धंधे ठप हुए। यहां तक कि अब मार्ग जब खाली हुए तो उन रास्तों की मरम्मत पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मोटी राशि खर्च करनी पड़ी। किसी वैचारिक मतभेद और मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति तो है, लेकिन इसे जिद बनाकर लाखों लोगों को परेशान करना कहीं परिपाटी तो नहीं बन रही? रास्तों को रोककर बैठना जिद का ठिकाना तो नहीं बनाया जा रहा? विशेषकर देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर इस तरह करना कहां तक उचित है? सीमाओं पर प्रदर्शनों को कैसे रोका जा सकता है और प्रदर्शनकारियों को इसके स्थान पर क्या विकल्प उपलब्ध कराया जा सकता है?  इस पर 94 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि हां।

वहीं, क्या लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन करने के लिए प्रदर्शनकारियों को दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थान मुहैया कराया जाना चाहिए? इस पर 98 फीसद लोगों ने कहा है कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, क्या दिल्ली की सीमाओं पर या राजधानी के भीतर किसी मार्ग पर लंबे समय तक प्रदर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए? इस पर 

अपनी मांगें पूरी कराने के लिए विभिन्न संगठनों के लोग दिल्ली-एनसीआर में आए दिन धरना-प्रदर्शन करते रहते हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न केवल आने-जाने में असुविधा का सामना करना पड़ता है, बल्कि रोजाना आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। सीएए और कृषि कानूनों के विरोध में हुए प्रदर्शनों से दिल्ली-एनसीआर ने कैसी परेशानियों का सामना किया, जानिए आंकड़ों की जुबानी :

2011: काला धन को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े स्तर पर आंदोलन किया था। कई दिन तक चला था। उक्त आंदोलन में कई राज्यों के लोगों ने हिस्सा लिया था। आंदोलन खत्म होने तक दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से मध्य जिले व नई दिल्ली जिले के कई मार्गो को डायवर्ट कर दिया था।

2011: जन लोकपाल विधेयक लाने को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने रामलीला मैदान में आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन 12 दिनों तक चला था।

2021: भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में पांच प्रतिशत का विकसित भूखंड उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है।

2020: भाकियू भानु गुट के किसानों ने नए कृषि कानून के विरोध में नोएडा के सेक्टर 14 ए के सामने नोएडा दिल्ली बार्डर पर सड़क रोक कर 61 दिन तक धरना प्रदर्शन किया था।

2017 : जेवर के दयानतपुर गांव में लड़की की हत्या के विरोध में ग्रामीणों ने यमुना एक्सप्रेस वे जाम किया था। एक्सप्रेस-वे जाम करने पर पुलिस ने 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

18 अक्टूबर: किसानों ने लखीमपुर खीरी कांड के विरोध में नोएडा दिल्ली बार्डर जाम कर दिया था।

2016: मंडोला में आवास विकास की योजना के तहत जमीन अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है।

2005 : गाजियाबाद में रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ।

2005 : अब तक वेव सिटी के खिलाफ इकला इनायतपुर गांव के पास प्रदर्शन चल रहा है।

किसानों के आंदोलन ने किया था दिल्ली-एनसीआर को परेशान

  • यूपी गेट पर प्रदर्शन से गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ की ओर से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को तीन से दस किलोमीटर अतिरिक्त दूरी प्रतिदिन तय करनी पड़ रही थी।
  • सिंघु बार्डर बाधित होने से दिल्ली से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब व हरियाणा जाने वाले लोगों को सिंघु गांव, औचंदी बार्डर, लामपुर बार्डर, जौन्ती बार्डर, सफियाबाद बार्डर व हरियाणा से सटे कुतुबगढ़, मुंगेशपुर आदि गांवों से होकर जाना पड़ता था।
  • चिल्ला बार्डर बंद होने से नोएडा से पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के साथ सेक्टर-18, फिल्म सिटी, नया बांस, सेक्टर-एक से लेकर 12 तक, सेक्टर-27, 28, 29, 37, 15, 15-ए सहित कई सेक्टरों के लोगों को परेशानी हुई।
  • इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी और खोड़ा की आंतरिक सड़कें जाम रहती थीं।
  • अतिरिक्त वाहनों की आवाजाही से आंतरिक सड़कें खराब हो गईं।

एनसीआर के शहरों में हिंसक प्रदर्शन

2009 : गाजियाबाद एनएच-24 के पास विजयनगर में डूब क्षेत्र में बनी अवैध कालोनियों को ध्वस्त करने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर हमला किया गया था। इसमें 1,200 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

01 सितंबर 2021 से अपनी मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने 17 दिसंबर को ढाई घंटे तक दिल्ली-नोएडा मार्ग को बाधित रखा। किसानों के खिलाफ सेक्टर-20 कोतवाली पुलिस में मुकदमा दर्ज किया गया। किसान नेता सुखबीर खलीफा समेत 61 नामजद व 700 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।