अमेरिकी अदालत की तलाक की डिक्री पर दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने लगाई रोक

 


पति की अमेरिका में करोड़ों की अचल संपत्ति है।
दिल्ली के एक युवक ने अपनी पत्नी से तलाक के लिए साकेत स्थित फैमिली कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर रखा था। करीब छह माह तक पत्नी कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया में शामिल हुई लेकिन उसने अचानक अमेरिका की एक फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी।

नई दिल्ली । दिल्ली के एक युवक ने अपनी पत्नी से तलाक के लिए साकेत स्थित फैमिली कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर रखा था। करीब छह माह तक पत्नी कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया में शामिल हुई लेकिन कुछ माह पहले उसने अचानक अमेरिका की एक फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। अमेरिका की कोर्ट ने सुनवाई के बाद तलाक का फैसला सुना दिया।

इस बात की जानकारी पति को हुई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पति ने साकेत स्थित फैमिली कोर्ट के जज संजीव कुमार सिंह की अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की कि अदालत अमेरिकी कोर्ट के फैसले के आधार पर महिला को कोई निर्णय लेने पर रोक लगाए। कोर्ट ने युवक की अपील पर 24 जनवरी तक महिला को इस फैसले के आधार पर कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया है।

अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी। पति की ओर से पैरवी कर रहीं एडवोकेट जूही अरोड़ा व एडवोकेट शकील अहमद ने याचिका में तर्क दिया कि दंपति भारतीय नागरिक है, विवाह भी भारत में हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार हुआ है और पति की ओर से दाखिल तलाक का मामला पहले ही साकेत कोर्ट में चल रहा है। पत्नी उस प्रक्रिया में शामिल रही है। फिर यही मामला अमेरिका की अदालत में ले जाना और वहां से तलाक की डिक्री हासिल कर लेना न्यायसंगत नहीं है।

पीड़ित पति का आरोप है कि उनकी पत्नी ने जानबूझकर अमेरिकी अदालत से तलाक की डिक्री हासिल की है ताकि इसके आधार पर वह अमेरिका स्थित उनकी संपत्ति में हिस्सा पा सके।पति व पत्नी दोनों ही दिल्ली के रहने वाले हैं और अमेरिका में दोनों मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े अधिकारी हैं। पति की अमेरिका में करोड़ों की अचल संपत्ति है।