10 साल का समय पूरा करने वाले डीजल वाहन मालिकों के पास मात्र तीन विकल्प, आप भी जानें डिटेल

 


राजधानी में ऐसे रजिस्टर्ड वाहनों की कुल संख्या एक लाख एक हजार 247 है।

दिल्ली सरकार ने एक जनवरी को 10 साल पूरे करने वाले सभी डीजल वाहनों का पंजीकरण रद कर दिया है। ऐसे रजिस्टर्ड वाहनों की कुल संख्या एक लाख एक हजार 247 है। रिकार्ड के मुताबिक ये वाहन साल 2007 से लेकर 2011 तक दिल्ली में पंजीकृत कराए गए हैं।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। यदि आपके पास भी डीजल वाहन है और उसका 10 साल का समय पूरा हो चुका है तो आपको भी अब इस बात की चिंता सता रही होगी कि आप अपने वाहन का अब क्या करेंगे? उसका इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं या वाहन को स्क्रैप कराना होगा? दरअसल अदालती आदेश का पालन करते हुए अब दिल्ली सरकार ने एक जनवरी को 10 साल पूरे करने वाले सभी डीजल वाहनों का पंजीकरण रद कर दिया है। राजधानी में ऐसे रजिस्टर्ड वाहनों की कुल संख्या एक लाख एक हजार 247 है। दिल्ली सरकार के रिकार्ड के मुताबिक ये वाहन साल 2007 से लेकर 2011 तक दिल्ली में पंजीकृत कराए गए हैं।

सरकार ने अब रजिस्ट्रेशन रद करने के साथ ही ऐसे वाहन चालकों को तीन विकल्प दिए हैं। पहला विकल्प ये है कि ऐसे मालिक परिवहन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेकर अपने वाहन को किसी दूसरे राज्य में ले जाकर वहां रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। दूसरा विकल्प इन वाहनों को इलेक्टि्रक में बदलवा लेने का है और तीसरा विकल्प इन्हें स्क्रैप (समाप्त) करा लेने का है। यदि वाहन मालिक ने इन तीनों से किसी विकल्प को नहीं चुना और वो अपने वाहन के साथ दिल्ली की सड़क पर चलते हुए पाए गए तो उसे जब्त कर लिया जाएगा।

एक बात ये भी सामने आ रही है कि फिलहाल 10 साल पुराने डीजल वाहनों को इलेक्टि्रक में बदलने का विकल्प बहुत आसान नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो यह प्रक्रिया पेट्रोल कार में सीएनजी किट लगवाने जैसी नहीं है। डीजल कार से इलेक्टि्रक में बदलने के लिए वाहन की पूरी चेसिस को ही बदलना होगा। यह प्रक्रिया अभी ट्रायल के दौरान है। कारों के मामले में देश में किसी भी राज्य में इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। दिल्ली सरकार ने इस बारे में कदम आगे बढ़ाया है।

पिछले सप्ताह परिवहन विभाग ने इन वाहनों की इलेक्टि्रक किट बनाने कंपनियों की बैठक बुलाई थी तथा इस मुद्दे पर उनकी राय ली थी। एक अधिकारी के अनुसार सभी कंपनियों ने इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताते हुए आगे आने की बात कही है। कंपनियों ने कहा है कि उन्होंने कारों और दोपहिया में इसका ट्रायल किया है जो सफल रहा है। विभाग के अधिकारी ने कहा है कि इस प्रयोग को लेकर सकारात्मक सोचने की जरूरत है। आठ कंपनियों का पैनल बनाया गया है। कंपनियों के संपर्क नंबर भी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं लोग उनसे संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।

दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) का स्पष्ट आदेश है कि वाहन को दूसरे राज्य के जिस शहर के लिए एनओसी मांगी जाएगी, उस शहर के मोटर लाइसेंसिंग अधिकारी से सहमति पत्र वाहन मालिक को दिखाना होगा। उसके बाद ही दिल्ली परिवहन विभाग उस वाहन के लिए एनओसी देगा। लेकिन, यह छूट डीजल के केवल 15 साल से कम पुराने वाहनों लिए ही रहेगी। इससे पुराने वाहनों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। यदि वाहन 15 साल से भी अधिक पुराना है तो उसे हर हाल में स्क्रैप कराना ही होगा।

मालूम हो कि एनजीटी ने जुलाई 2016 में दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में 10 साल से अधिक पुराने डीजल चालित वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल चालित वाहनों के पंजीकरण और चलने पर प्रतिबंध से संबंधित निर्देश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 अक्टूबर, 2018 को दिल्ली में 15 साल पुराने पेट्रोल चालित और 10 साल पुराने डीजल चालित वाहनों के चलने पर रोक लगा दी थी। जानकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 40 लाख पुराने वाहन हैं। इसमें 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल से चालित वाहन भी शामिल हैं। परिवहन विभाग ने कहा कि अब दिल्ली में 10 साल से पुराना कोई डीजल चालित वाहन नहीं चल सकेगा। प्रत्येक दिन जो भी वाहन 10 साल पूरे करता जाएगा, उसका पंजीकरण निरस्त होता जाएगा।