देश के 132 शहरों में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तीन साल के नतीजे निराशाजनक, जानिए क्या है इसके पीछे का कारण


देश के 132 शहरों में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) का परिणाम निराशाजनक।

आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश नान-अटेनमेन्ट (जहां पहले ध्यान नहीं दिया जाता था) शहरों में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में गिरावट तो कहीं कहीं नाममात्र की हुई जबकि काफी शहरों में वृद्धि देखने को मिल गई।

नई दिल्ली  ,surender aggarwal। देशभर के 132 शहरों में पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को 20-30 प्रतिशत तक कम करने के लिए शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तीन साल के नतीजे निराश करने वाले हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि जमीनी स्तर पर प्रगति या तो बहुत कम या फिर हुई ही नहीं। आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश नान-अटेनमेन्ट (जहां पहले ध्यान नहीं दिया जाता था) शहरों में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में गिरावट तो कहीं कहीं नाममात्र की हुई, जबकि काफी शहरों में वृद्धि देखने को मिल गई।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 102 शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए 10 जनवरी 2019 को एनसीएपी शुरू किया था, बाद में 30 और शहरों को इसमें जोड़ दिया गया। इन 132 शहरों को नान-अटेनमेन्ट शहर कहा जाता है, क्योंकि इन्होंने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (एनएएमपी) के तहत 2011-15 की अवधि में भी राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को पूरा नहीं किया था। पीएम 2.5 और पीएम 10 के लिए देश में वार्षिक औसत सीमा क्रमश: 40 और 60 माइक्रोग्राम/प्रति घन मीटर है।

पीएम 2.5 को 30 फीसद कम करने का है लक्ष्य

एनएसीपी के तहत 2024 तक प्रमुख प्रदूषक तत्व पीएम 10 और पीएम 2.5 को 20-30 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 2017 को आधार वर्ष के रूप में रखा गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) राष्ट्रीय स्तर पर इसका नेतृत्व कर रहे हैं। राज्य स्तर पर, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, चिह्नित विभागों और एजेंसियों द्वारा निगरानी करना अनिवार्य है। कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मानिटरिंग सिस्टम (सीएएक्यूएमएस) से प्राप्त वायु गुणवत्ता निगरानी आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जिन शहरों में 2019 और 2021 के पीएम 2.5 और पीएम 10 स्तर उपलब्ध थे, उनमें से वाराणसी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। 132 शहरों में से केवल 36 ही मानदंडों पर खरे उतरे।

प्रदूषण के मामले में शहरों की ऐसी है स्थिति

2020 को अगर छोड़ दिया जाए तो लखनऊ पीएम 2.5 के 116 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर के वार्षिक स्तर के साथ पहले स्थान पर रहा था, लेकिन इस साल 100 से ऊपर वार्षिक स्तर के साथ गाजियाबाद प्रदूषित शहरों की तालिका में शीर्ष पर रहा। नोएडा, दिल्ली, मुरादाबाद, जोधपुर जैसे अधिकांश शहरों में पीएम 2.5 के स्तर में मामूली गिरावट देखी गई। यह शहर पूरे वर्ष शीर्ष 10 प्रदूषित नान-अटेनमेन्ट शहरों में शामिल रहे हैं। पीएम 2.5 के स्तर में गिरावट के साथ वाराणसी 2019 में पांचवीं रैंक से 2021 में 37-वें स्थान पर आ गया। सूची में शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में से चार उत्तर प्रदेश जबकि तीन शहर - हावड़ा, आसनसोल और कोलकाता बंगाल के थे।

प्रदूषण में इन आठ शहरों का है बुरा हाल

गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, वाराणसी, मुरादाबाद, जोधपुर, मंडी गोबिनगढ़ और हावड़ा ये शहर पीएम 10 के लिहाज से सबसे प्रदूषित शहर हैं। 10 शहरों में से चार उत्तर प्रदेश के हैं। पीएम 2.5 की तरह, गाजियाबाद पीएम 10 के स्तर के लिए भी सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर रहा है। शहर में पीएम 10 के स्तर में केवल 243 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 238 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की मामूली गिरावट देखी गई।