इस बार भी बेनतीजा रही चीन के साथ 14वें राउंड की कोरकमांडर स्‍तरीय बातचीत, संयुक्‍त बयान से मिले कई संकेत

 

संयुक्त बयान के अनुसार 14वें दौर की इस वार्ता में कोई खास सफलता नहीं मिली है।

संयुक्त बयान के अनुसार 14वें दौर की इस वार्ता में कोई खास सफलता नहीं मिली है। हालांकि दोनों पक्ष संपर्क बनाए रखने और शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। भारत और चीन के बीच मई 2020 से चले आ रहे सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए करीब तीन महीने बाद बुधवार को हुई सैन्य अधिकारियों की वार्ता भी बेनतीजा साबित हुई है। दोनों पक्षों की ओर से जारी संयुक्‍त बयान में कहा गया है कि दोनों देश पिछले परिणामों को और मजबूत करेंगे। संयुक्त बयान के अनुसार 14वें दौर की इस वार्ता में कोई खास सफलता नहीं मिली है। हालांकि दोनों पक्ष संपर्क बनाए रखने और शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं।  

भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने बुधवार को कहा था कि भारत 14वें दौर की वार्ता में पूर्वी लद्दाख में पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (हॉट स्प्रिंग्स) पर विघटन से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए आशान्वित है। संयुक्‍त बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख सीमा) में एलएसी के साथ संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए विचारों का स्पष्ट और गहन आदान-प्रदान किया।

दोनों पक्ष (India and China) सहमत हैं कि उन्‍हें अपने नेताओं की ओर से प्रदान किए गए मार्गदर्शन का पालन करना चाहिए और शेष मुद्दों के समाधान के लिए काम करना चाहिए। जारी बयान के मुताबिक ऐसा करना पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ शांति बहाल करने में मदद करेगा और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति लाएगा। दोनों पक्ष पिछले परिणामों पर काम करने और पश्चिमी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रयास करने पर भी सहमत हुए हैं।

दोनों पक्ष (India and China) निकट संपर्क में रहने और सैन्य एवं राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखने और शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर काम करने पर सहमत हुए हैं। बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि कमांडरों की अगले दौर की वार्ता भी जल्द होनी चाहिए। वहीं जानकारों की मानें तो इस साल दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा कैसी रहेगी इसका बहुत हद तक निर्धारण वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगा।