यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की दस्‍तक के बीच फ‍िजां में घुलने लगे चुनावी रंग के साथ चुनावी गीत

 

चुनावी आरोप- आक्षेप सुनाई दे रहा तो गीतों में भी यह रंग दिखाई दे रहा।

 गीतों में भी चुनावी रंग दिखाई दे रहा। कलाकारों की ओर से पक्ष और विपक्ष के नेताओं के गुणगान करते हुए गीत लिखे जा रहे हैं। इसमें विकास योजनाओं को समेटते हुए एक दूसरे की मैदानी जंग को भी इसका अंग बनाया जा रहा है।

वाराणसी । विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही राजनीतिक दलों के बोल सियासी हो चले हैं। अब हर शब्द में आरोप-आक्षेप सुनाई दे रहा तो गीतों में भी यह रंग दिखाई दे रहा। कलाकारों की ओर से पक्ष और विपक्ष के नेताओं के गुणगान करते हुए गीत लिखे जा रहे हैं। इसमें विकास योजनाओं को समेटते हुए एक दूसरे की मैदानी जंग को भी इसका अंग बनाया जा रहा है।

इसे कुछ इस तरह समझ सकते हैं कि पीएम के शहर बनारस में गीतकार कन्हैया दुबे केडी का गीत लागल चुनाव के बड़का अखाड़ा, सांस्कृतिक राजधानी में... की गूंज चुनाव के सिर पर आ जाने का संकेत दे रहा। होई भिड़ंत भैया फरिया जाइ, के बाटे कितना पानी में... मुकाबले की गंभीरता दर्शा रहा। इसके अलावा मोदी जी का मंत्र सारे जग में छाया है, भारत में विकास का बिगुल बजाया है... और मोदी जी का सपना हुआ है साकार, लोकार्पण किए आकर के विश्वनाथ के द्वार... काशी में विकास की गाथा सुना रहा। इसमें श्रीकाशी विश्वनाथ धाम फोकस में है।

बाबा दरबार से गंगा तट तक विस्तारित इसके नव्य भव्य परिसर का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी 13 दिसंबर को लोकार्पण किया था। इस अवसर पर माह पर्यंत आयोजन शृंखला चल रही है। इसमें इस तरह के गीत अमलेश शुक्ला समेत विभिन्न कलाकारों द्वारा अलग-अलग मंचों से गाए जा रहे हैं। इन्हें जोशीले अंदाज में जन विश्वास यात्रा हो या अन्य आयोजन सुरों से सजाए जा रहे।

यही नहीं इसमें विपक्ष भी निशाने पर आ रहा, कलाकार मन इसे माया मुलायम हो गइले हो, केजरी कईले बवाल, उल्टा लटक जइहै यूपी में, गले न पाई उनकर दाल... जैसे गीत बज रहे हैं। बुआ भतीजा चच्चा बच्चा सब ही देखा बेहाल बा... भी गाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के पक्ष में कलाकारों की ओर से 22 में बाइसकिल... और अखिलेश भइया आएंगे... आदि गांव-गलियों में झूम कर बज रहे हैं।