28 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति पर दिल्ली हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी, आप भी जानें

 

एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने की टिप्पणी।

28 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि भ्रूण को जारी रखना या न रखना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है।

नई दिल्ली, संवाददाता। 28 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि भ्रूण को जारी रखना या न रखना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को देखते हुए गर्भधारण को जारी रखने या नहीं रखने के निर्णय लेने की स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने पाया कि स्वस्थ और सामान्य जीवन के साथ भ्रूण की अनुकूलता की कमी बड़े पैमाने पर है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को जीवन के प्रारंभिक चरण में कार्डियक सर्जरी की जरूरत होगी। विशेषज्ञों की राय के अनुसार बच्चे के शारीरिक तौर पर विकास की संभावना कम है और यह भी चेतावनी दी गई कि उसे शल्य चिकित्सा का सामना करना पड़ेगा। पीठ ने उक्त टिप्पणी के साथ याचिकाकर्ता को गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी।

पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि मामले में गठित मेडिकल बोर्ड ने दंपति को इस स्तर पर समाप्ति की प्रक्रिया की संभावित जटिलताओं के बारे में बताया है।पीठ ने कहा कि गर्भधारण करना महिला के प्रजनन अधिकारों का एक पहलू है और यह उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आयाम है। इस प्रकार याचिकाकर्ता को यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है। वर्तमान मामले में भ्रूण कई तरह की गंभीर बीमारियों से पीडि़त था और महिला ने भ्रूण को गिराने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की थी।