ओमिक्रोन के मिसिंग केस को लेकर प्रो. मणींद्र अग्रवाल चिंतित, बोले- हर 33 में 32 केस हो रहे मिस

 

ओमिक्रोन केस पर आइआइटी प्रोफेसर की निगाह।

आइआइटी के विज्ञानी ने देश में संक्रमण के केस मिसिंग होने पर चिंता जताई है और कहा है कि 33 में ओमिक्रोन का एक ही केस सामने आ रहा है। अब सीरो सर्वे से जुडऩे के बाद गणितीय माडल मिसिंग केस का पता लगा सकेगा।

कानपुर, संवाददाता। आइआइटी कानपुर के विज्ञानी व पद्मश्री से सम्मानित प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के केसों की सही संख्या पता न चलने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ओमिक्रोन के फैलने की रफ्तार डेल्टा से काफी तेज है, लेकिन इसके सही केस सामने नहीं आ रहे हैं। भारत में 33 लोगों में से एक केस ही सामने आ रहा है, बाकी 32 केस मिस हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इम्युनिटी बेहतर होने से तमाम लोगों को संक्रमण का अहसास ही नहीं हो पा रहा है। अगर सीरो सर्वे से गणितीय माडल को जोड़ा जाए तो इन मिसिंग केस की सही संख्या का पता लग सकती है।

उनका कहना है कि हर देश में ओमिक्रोन के केस का सही पता न चलने की समस्या है। अमेरिका में साढ़े चार में से एक केस, यूनाइटेड किंगडम में 3.2 में से एक, साउथ अफ्रीका में 17 में से एक केस का ही पता लग रहा है। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट से ओमिक्रोन के फैलने की रफ्तार काफी तेज है। यह मेरे पूर्वानुमान से कहीं ज्यादा है। अब तक भारत में सामने आए डाटा के आधार पर इसका सही आकलन करने की कोशिश की जा रही है। जिस तरह से ओमीक्रान के केस बढ़ रहे, उससे यही प्रतीत हो रहा है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर फरवरी की शुरुआत में ही चरम पर पहुंच सकती है। यही नहीं दिल्ली में केस काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। वहां पर जनवरी के अंत तक ही तीसरी लहर चरम पर होने की आशंका है।

उन्होंने बताया कि भारत में 80 प्रतिशत लोगों में सेल्फ नेचुरल इम्युनिटी (कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद पैदा हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता) विकसित हो चुकी है। इसी वजह से अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या कम है। अब तक यही प्रतीत हो रहा है कि ओमिक्रोन वैरिएंट ज्यादा घातक नहीं है। फिर भी लोगों को सचेत रहने की जरूरत है और अगर संक्रमण के जरा भी लक्षण दिखें तो अपनी जांच जरूर कराएं। मास्क पहनकर घरों से निकलें, शारीरिक दूरी के नियम और कोविड गाइडलाइन का पालन करते रहें। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम में केस लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन यह चरम पर कब होंगे, यह कहा नहीं जा सकता है।