दवाओं के मानव परीक्षण के अमानवीय कारोबार की झकझोरने वाली कहानी, पढ़ें पूरा रिव्यू

 

Human Web Series Review Staring Shefali Shah Kirti Kulhari. Photo- Instagram

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज ह्यूमन दवाओं के मानवीय परीक्षण के गैरकानूनी कारोबार और अमानवीय पहलू पर एक झकझोरने वाली टिप्पणी है। 40-50 मिनट अवधि के 10 एपिसोड्स में फैली सीरीज ह्यूमन ड्रग टेस्टिंग के सामाजिक और आर्थिक पहलू पर फोकस करते हुए आगे बढ़ती है।

 नई दिल्ली। दवा इंसान की बीमारी ठीक करके उसे सेहतमंद बनाती है, लेकिन क्या होगा, अगर वही दवा उसे बीमार बनाना शुरू कर दे, वो भी जाने-अनजाने नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत और लोगों को बीमार करने का यह कारोबार उनकी पीड़ा को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ इसलिए फलता-फूलता रहे, क्योंकि इससे समाज के कथित रसूखदार और इज्जतदार लोगों का लालच जुड़ा है।

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज ह्यूमन दवाओं के मानवीय परीक्षण के गैरकानूनी कारोबार और अमानवीय पहलू पर एक झकझोरने वाली टिप्पणी है। 40-50 मिनट अवधि के 10 एपिसोड्स में फैली सीरीज ह्यूमन ड्रग टेस्टिंग के सामाजिक और आर्थिक पहलू पर फोकस करते हुए आगे बढ़ती है। विपुल अमृलाल शाह और मोजेज सिंह निर्देशित ह्यूमन हार्ड हिटिंग थ्रिलर सीरीज है, जो अपने चरित्रों को उनकी खामियों के साथ नि:संकोच पेश करती है।ह्यूमन की कथाभूमि मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर भोपाल है। कहानी मुख्य रूप से तीन मुख्य किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। डॉ. गौरी नाथ, जो सबसे बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल मंथन की कर्ता-धर्ता है। डॉ. सायरा सभरवाल, जो एक कार्डिएक सर्जन है। गौरी नाथ उसे मंथन में लेकर आयी हैं। सायरा, गौरी के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित है और आइकॉन के रूप में देखती है। इस कहानी का तीसरा अहम किरदार मंगू है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का मंगू अपने परिवार का जीवन स्तर सुधारने की जुगत में लगा है, मगर इसके लिए वो शॉर्ट-कट ढूंढता है, जिससे जल्द पैसा कमा सके। 

शहर में फार्मास्युटिकल कम्पनी वायु प्रतिबंधित दवा एस93आर का अवैध रूप से मानवीय परीक्षण करवा रही है। सच्चाई बताये बिना पैसों का लालच देकर गरीबों को गिनी पिग की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वायु के मालिक मोहन वैद्य (मोहन आगाशे) और उनका बेटा अशोक वैद्य (आदित्य श्रीवास्तव) हैं। गौरी नाथ अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से जुड़ी है। सनक की हद तक अति महत्वाकांक्षी गौरी नाथ भोपाल में विदेशी कंपनी की मदद से एक बड़ा न्यूरो सेंटर भी बना रही है, जिसके विस्तार के लिए उसे पैसे के साथ जमीन चाहिए, जो सियासी सपोर्ट के बिना संभव नहीं है। गौरी अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने के रास्ते पर है, मगर समस्या तब खड़ी होती है, जब मंगू की मां ह्यूमन ड्रग ट्रायल का शिकार बनती है और एक दिन मर जाती है। एक एनजीओ की मदद से मंगू डॉ. सायरा सभरवाल तक पहुंचता है और फिर लगभग अविजित लगने वाली डॉ. गौरी नाथ के अंत की शुरुआत होती है। 

इस कहानी को इशान बनर्जी और मोजेज सिंह ने पटकथा के जरिए दिलचस्प विस्तार दिया है। ड्रग टेस्टिंग से जुड़ी घटनाओं को रोमांचक ढंग से दिखाया है। मेडिकल इंडस्ट्री में भ्रष्टाचार कितना जानलेवा और खतरनाक हो सकता है, ह्यूमन के दृश्य इसे कामयाबी के साथ दिखाते हैं। सीरीज में भोपाल गैस त्रासदी और कोरोना वायरस पैनडेमिक के कारण हुए लॉकडाउन के संदर्भ का इस्तेमाल भी किया गया है। यह दोनों ही घटनाएं भोपाल की गरीब बस्तियों में आर्थिक मजबूरियों को दिखाने का सबब बनती हैं। ह्यूमन का कोई भी प्रमुख किरदार मुकम्मल या आदर्श नहीं है। सभी में कोई ना कोई चारित्रिक दोष है और लेखकों ने इन दोषों को दिखाने में कोई संकोच नहीं किया है।

सीरीज के निर्देशक विपुल शाह ने जागरण डॉट कॉम से बातचीत में कहा था कि इसकी सबसे ताकत परफॉर्मेंसेज हैं। विपुल का यह दावा सीरीज देखने के बाद सही साबित होता है। डॉ. गौरी नाथ के किरदार में शेफाली शाह ने जबरदस्त अभिनय किया है। उनका कैरेक्टर ग्राफ जिस तरह पॉजिटिव से नेगेटिव की ओर बढ़ता है, शेफाली ने उसे प्रदर्शित करने में वाकई कमाल किया है। एक गरिमामयी, महत्वाकांक्षी, मृदुभाषी डॉक्टर का किरदार सीरीज का अंत आते-आते सनकी, स्वार्थी और निर्दयी इंसान में बदल जाता है।

गौरी नाथ का भी अपना अतीत है, जिसने उसके मौजूदा व्यक्तित्व को आकार दिया है। कुछ ऐसा ही किरदार डॉ. सभरवाल का है, जिसे कीर्ति कुल्हरी ने निभाया है। यह किरदार गौरी नाथ की तरह की उलझा हुआ है। इसका भी अपना अतीत है, जिससे सायरा आज भी जूझ रही है। कीर्ति ने इस किरदार के विभिन्न भावों को कामयाबी के साथ पेश किया है। मर्दानी 2 में मुख्य विलेन बने विशाल ने मंगू के किरदार में सच में जान डाल दी है। ह्यूमन एक इंगेजिंग मेडिकल ड्रामा है। हालांकि, शुरुआती पांच एपिसोड काफी कसे हुए हैं, जिनसे शो को एक बेहतरीन टेक ऑफ मिलता है। बाद के कुछ एपिसोड्स धीमी रफ्तार लगते हैं। आखिरी एपिसोड लगभग एक घंटे का है। हालांकि, सीरीज का क्लाइमैक्स उतना असरदार नहीं है, जैसा कि शुरुआत से माहौल बना था। कुछ सवाल अनुत्तरित रह गये हैं। सम्भव है, उनका जवाब दूसरे सीजन में मिले। 

कलाकार- शेफाली शाह, कीर्ति कुल्हरी, विशाल जेठवा, राम कपूर, मोहन आगाशे, आदित्य श्रीवास्तव आदि।

निर्देशक- विपुल अमृतलाल शाह, मोजेज सिंह।

निर्माता- विपुल अमृतलाल शाह

अवधि- 40-55 मिनट प्रति एपिसोड, कुल 10 एपिसोड्स

रेटिंग- *** (तीन स्टार

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