डीएसजीएमसी में अध्यक्ष की कुर्सी पर विवाद, कार्यकारिणी की बैठक में बाठ को दी गई जिम्मेदारी

 

सिरसा पहले ही अपना इस्तीफा वापस लेने की कर चुके हैं घोषणा।

कालका का कहना है कि उन्होंने गुरुद्वारा एक्ट के तहत कार्यकारिणी बोर्ड की बैठक बुलाई थी जिसमें 15 में से नौ सदस्यों ने सिरसा का इस्तीफा स्वीकार करके उसे जनरल हाउस को भेज दिया है। उनकी जगह नई कार्यकारिणी गठित होने तक बाठ अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

नई दिल्ली  ,surender aggarwal। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) की नई कार्यकारिणी घोषित होने तक अध्यक्ष पद की कुर्सी संभालने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मनजिंदर सिंह सिरसा एक दिसंबर को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिए थे लेकिन शुक्रवार को उन्होंने इसे वापस लेने की घोषणा कर दी। वहीं, निवर्तमान महासचिव हरमीत सिंह कालका द्वारा शनिवार को बुलाई गई कार्यकारिणी बोर्ड की बैठक में निवर्तमान उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह बाठ को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सिरसा ने बताया कानून का उल्लंघन

सिरसा ने इसे कानून का उल्लंघन बताया है। डीएसजीएमसी के महाप्रबंधक ने गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय के निर्देश का उल्लेख करते हुए कहा है कि कार्यकारिणी बोर्ड को 29.09.21 तक विस्तार दिया गया था। इससे आगे विस्तार देने का मामला उपराज्यपाल के पास लंबित है। इस स्थिति में बोर्ड की बैठक नहीं हो सकती है। अब इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी सिरसा निभाएंगे या बाठ?

15 में से नौ ने सिरसा का इस्तीफा किया स्वीकार

कालका का कहना है कि उन्होंने गुरुद्वारा एक्ट के तहत कार्यकारिणी बोर्ड की बैठक बुलाई थी जिसमें 15 में से नौ सदस्यों ने सिरसा का इस्तीफा स्वीकार करके उसे जनरल हाउस को भेज दिया है। उनकी जगह नई कार्यकारिणी गठित होने तक बाठ अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि सभागार में पहले से सिरसा कुछ सदस्यों के साथ मौजूद थे और आग्रह करने के बावजूद वहां से नहीं हटे तो बोर्ड के सदस्यों ने महामंत्री के कार्यालय में बैठक की। बैठक में हरगोबिंद एन्क्लेव स्थित डीएसजीएमसी के शिक्षण संस्थान के परिसर में गलत तरीके से चल रहे कंप्यूटर केंद्र, शूटिंग रेंज व जिम की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी में बाठ, हरिंद्रपाल सिंह और विक्रमजीत सिंह रोहिणी शामिल हैं।

कमेटी कानून के अनुसार चलेगा

वहीं, सिरसा ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो डीएसजीएमसी का सदस्य बनना चाहते हैं और न अध्यक्ष। कमेटी का कामकाज बाधित नहीं हो इसके लिए वह अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कालका भी यह बात जानते हैं। बावजूद इसके वह अन्य लोगों के साथ मिलकर कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। कमेटी कानून के अनुसार चलेगा। डीएसजीएमसी के महाप्रबंधक धर्मेंद्र सिंह ने सदस्यों को पत्र जारी करके बैठक को अवैध बताने के साथ ही कहा कि कार्यकारिणी बोर्ड बलपूर्वक किसी पदाधिकारी की शक्तियां किसी अन्य को स्थानांतरित नहीं कर सकता है।