दिल्ली नगर निगम के स्कूल में फर्जी तरीके से पाई थी नौकरी, शिकायत के दो साल बाद आरोपित गिरफ्तार

 



फर्जी तरीके से निगम के स्कूल में पाई थी शिक्षक की नौकरी, गिरफ्तार

दिल्ली नगर निगम के स्कूल में फर्जी तरीके से प्राथमिक शिक्षक की नौकरी पाने वाले आरोपित रवि डबास को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। आरोपित ने खुद के बदले किसी अन्य को परीक्षा में बैठा दिया था।

नई दिल्ली । दिल्ली नगर निगम के स्कूल में फर्जी तरीके से प्राथमिक शिक्षक की नौकरी पाने वाले आरोपित रवि डबास को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। आरोपित ने खुद के बदले किसी अन्य को परीक्षा में बैठा दिया था। अक्टूबर 2019 से वह फिरोजशाह कोटला स्थित स्कूल में नौकरी कर रहा था। परीक्षा के कुछ समय बाद ही डीएसएसएसबी ने दिल्ली पुलिस में शिकायत कर दी थी। जांच में पुलिस को दो साल लग गए। अब जाकर फर्जीवाड़ा की पुष्टि होने पर रवि डबास को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस जल्द निगम के अधिकारी को रवि डबास को नौकरी से बर्खास्त करने के लिए पत्र लिखेगी।डीसीपी राजेश देव के मुताबिक रवि डबास , कंझावला का रहने वाला है। उसने एमडीयू, रोहतक से स्नातक किया है और इंदौर, मध्यप्रदेश से डिप्लोमा किया है। इसके पिता डीडीए से सेवानिवृत्त है और मां सेवानिवृत्त शिक्षिका है।

एसीपी संतोष कुमार व इंस्पेक्टर नरेश सोलंकी की टीम ने 12 जनवरी को रवि डबास को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। कड़कड़डूमा स्थित दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में उप सचिव प्रशासन एमके निखिल ने दिसंबर 2019 में दिल्ली पुलिस में शिकायत कर कहा था कि सहायक प्राथमिक शिक्षक व निगम के स्कूल में शिक्षक के चयन के लिए आयोजित परीक्षा में सभी सुरक्षा उपायों के बावजूद कई परीक्षार्थी अपने बदले दूसरे को बैठाने में सफल हो गए। उक्त शिकायत पर 17 दिसंबर को क्राइम ब्रांच ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। जांच के दौरान डीएसएसएसबी व असिस्टेंट डायरेक्टर शिक्षा विभाग से कई रिकार्ड व सूचनाएं एकत्र की गई।

रवि डबास का सलेक्शन हो जाने पर उसने फिरोजशाह कोटला स्थित निगम के स्कूल में 22 अक्टूबर 2019 को बतौर प्राथमिक शिक्षक जॉइन कर लिया था। परीक्षा में उसका सेंटर जीबीएसएसएस, खानपुर पड़ा था। 30 नवंबर 2018 की वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त की गई। उसका विश्लेषण किया गया। वीडियो रिकार्डिंग में परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों व हाल में भी प्रवेश को दिखाया गया था। लेकिन जांच में उक्त वीडियो रिकार्डिंग में न तो परीक्षा केंद्र के प्रवेश बिंदु पर और न ही परीक्षा हॉल में रवि डबास की पहचान की जा सकी।

डीएसएसएसबी ने प्रावधान किया था कि सभी उपस्थित होने वाले परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड की दूसरी प्रति पर अपने अंगूठे का निशान लगाना होगा, जिसे डीएसएसएसबी द्वारा संरक्षित किया गया था। रवि डबास के नमूने के अंगूठे का निशान और परीक्षा केंद्र पर निरीक्षक द्वारा प्रवेश पत्र पर लिए गए परीक्षार्थी के अंगूठे के निशान को तुलना के लिए फिंगर प्रिंट ब्यूरो को भेजा गया था। उसमे पता चला कि रवि डबास के अंगूठे का निशान मैच नहीं किया। पूछताछ में पता चला कि रवि ने फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान पुरानी क्लीन शेव वाली फोटो का इस्तेमाल किया था। जबकि उसके बदले बैठने वाला युवक दाढ़ी रख रखा था, जिससे उसके चेहरे की आकृति छिप गई थी। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा एजेंसियां ​​और निरीक्षक उसके लिए उपस्थित होने वाले युवक की पहचान नहीं कर सके थे।