कमाल का यह सरकारी प्राइमरी स्कूल, जहां लगता 'नो एडमिशन' का बोर्ड; स्मार्टनेस में महंगे कांवेंट भी पीछे

 

शिक्षक रवि प्रताप सिंह ने गोंडा के सरकारी प्राथमिक विद्यालय को महज पांच साल में नंबर वन बना दिया।

गोंडा जिले के शिक्षक रवि प्रताप सिंह जिन्होंने सरकारी प्राथमिक विद्यालय को महज पांच साल में हर क्षेत्र में नंबर वन बना दिया। सरकार को बच्चों का दाखिला कराने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाना पड़ता है तो इस विद्यालय में वर्ष भर एडमीशन फुल का बोर्ड लगा रहता है।

लखनऊ। 'सपने वो नहीं, जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने तो वो हैं जो हमें सोने नहीं देते' डा. एपीजे अब्दुल कलाम की इन लाइनों को बहुतों ने सुना और पढ़ा होगा। इन्हें हकीकत में जी रहे हैं गोंडा जिले के शिक्षक रवि प्रताप सिंह जिन्होंने सरकारी प्राथमिक विद्यालय को महज पांच साल में हर क्षेत्र में नंबर वन बना दिया है। सरकार को बच्चों का दाखिला कराने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाना पड़ता है तो इस विद्यालय में वर्ष भर एडमीशन फुल का बोर्ड लगा रहता है।

प्राथमिक विद्यालय का नाम जेहन में आते ही बदरंग इमारत में जैसे-तैसे पढ़ने वाले बच्चों की तस्वीर उभरती रही है, इसीलिए सरकार को आपरेशन कायाकल्प अभियान चलाकर स्कूलों की सूरत बदलनी पड़ी। अफसरों को इसकी प्रेरणा भी गोंडा जिले के कर्नलगंज ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय धौरहरा जैसे स्कूलों से ही मिली होगी। इस विद्यालय को बाहर से निहारने या अंदर जाकर देखने में यकीन नहीं होगा कि संस्था 'सरकारी' है।

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स्कूल की वेबसाइट, यू-ट्यूब चैनल व एप : स्कूल की अपनी वेबसाइट, यू-ट्यूब चैनल और उद्भव नामक एप है। कक्षा एक से पांच तक के 413 बच्चों को डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिली है। पढ़ाई का स्तर इतना बेहतर कि ब्रिटिश काउंसिल से सह शिक्षा के लिए आवेदन किया गया है। प्रधानाध्यापक व दो शिक्षामित्र सहित छह शिक्षक तैनात हैं। कक्षाओं में डेस्क-बेंच पर बैठकर पढ़ाई होती है, सभी छात्र-छात्राएं टाई, बेल्ट व आइ कार्ड के साथ पूरे यूनीफार्म में आते हैं। परिसर में सीसीटीवी से कक्षाओं व खेलकूद आदि की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। बिजली न आने पर सोलर पैनल का इंतजाम है।

चतुर्दिक गुणवत्ता पर मिला आइएसओ प्रमाणपत्र : विद्यालय को आइएसओ (इंटरनेशल आर्गेनाइजेशन फार स्टैंडराइजेशन) की ओर से एक दिसंबर 2021 को 9001:2015 का प्रमाणपत्र मिला है। स्कूल में छह शिक्षण कक्ष हैं, उनमें से तीन स्मार्ट क्लास के रूप में चल रहे हैं। स्मार्ट क्लास भी प्रोजेक्टर से नहीं चलती, बल्कि पढ़ाई डिजिटल यानी टच बोर्ड से होती है। हाईस्पीड इंटरनेट के साथ वाईफाई की सुविधा के साथ ही कंप्यूटर व टैबलेट का प्रशिक्षण देकर बच्चों को तकनीक के मामले में दक्ष बनाया जा रहा। स्कूल की चहारदीवारी आकर्षक है और परिसर में तरह-तरह के पेड़-पौधों की भरमार है।

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कोरोना कालखंड में मोहल्ला क्लास : कोरोना के विकट दौर में जब विद्यालय बंद थे और टीवी और आनलाइन माध्यम से किसी तरह पढ़ाई कराई जा रही थी, उस समय विद्यालय के शिक्षक व धौरहरा स्कूल से पढ़कर निकले बच्चे मोहल्ला कक्षाएं लगाकर बच्चों को शिक्षित करने में जुटे थे। साथ ही आनलाइन पढ़ाई कराने के लिए लोगों की मदद ली गई। सरकार व स्कूल के एप पर शिक्षण सामग्री निरंतर भेजी गई और उसी समय टेस्ट आदि भी होते रहे। यह जरूर है कि कोविड की वजह से स्कूल का समर कैंप नहीं लग सका।

जहां पढ़े, वहीं बने प्रधानाध्यापक : मुंडेरवा निवासी रवि प्रताप धौरहरा विद्यालय में कुछ समय विद्यार्थी भी रहे, तब स्कूल की हालत अच्छी न थी और वे सोचते थे कि कभी मौका मिला तो इसे शानदार बनाएंगे। हाईस्कूल, इंटर व बीए में सामान्य विद्यार्थी रहे रवि का 2008 में चयन शिक्षक पद पर बांदा जिले के लिए हो गया। प्रशिक्षण पाने के बाद बांदा में ही सहायक अध्यापक रहे। अंतर जिला तबादले में वे 2013 में गोंडा आए और धौरहरा प्राथमिक विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक बने। उस समय चंद विद्यार्थी पढ़ने आते थे उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को प्रेरित किया कि अपने बच्चों को पढ़ने भेजें। 2015 में ही स्मार्ट क्लास शुरू कराने के साथ स्कूल संवारने में जुट गए। पदोन्नति हुई तो 2016 में अफसरों ने उन्हें वहीं प्रधानाध्यापक बनाया। इसी ब्लाक के जूनियर हाईस्कूल में रवि के पिता भगवान बख्श सिंह प्रधानाध्यापक हैं।

उम्र से ज्यादा ब्लाक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मिले पुरस्कार : आदर्श शिक्षक के साथ ही यूथ आइकान भी हैं रवि प्रताप, वे 23 वर्ष की उम्र में शिक्षक बने और अब 33 वर्ष की आयु में ब्लाक से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक 36 पुरस्कार पा चुके हैं। जिले का प्रथम स्कूल पुरस्कार उन्हें मिला। एनसीईआरटी के सेमिनार में सहभागी रहे, विश्व गौरैया संरक्षण सूची में विद्यालय को स्थान दिलाया। आइसीटी नेशनल अवार्ड, पृथ्वी दिवस पर वाशिंगटन से प्रमाणपत्र, थाईलैंड में जैव विविधता दिवस समारोह में सम्मान, विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर डब्ल्यूएचओ से बधाई पत्र मिला। केंद्र व प्रदेश सरकार ने यूथ आइकान 2020 घोषित किया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति वे बच्चों को लगातार प्रेरित कर रहे हैं। स्कूल में अमेरिका, हांगकांग व वियतनाम से शोधार्थी आ चुके हैं।

लिखी कई किताबें, बच्चे चित्रकार : शिक्षक रवि ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए मैं भी पढ़ने जाऊंगा शीर्षक से पुस्तक लिखी, इसमें समर कैंप आदि में बच्चों की गतिविधियों पर कहानियां हैं। छात्र-छात्राओं ने जो चित्र बनाए उस पर नन्हें चित्रकार पुस्तक लिख डाली, नन्हा कछुआ सहित तीन किताबों का विमोचन हो चुका है। रीशू चली चिड़ियाघर, तीन दोस्त और पापा के दोस्त पुस्तकें इसी वर्ष प्रकाशित होनी हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि उत्साह, ऊर्जा व जोश किसी भी असंभव काम को संभव में बदल सकता है।