बढ़ते संक्रमण की लहर के बीच सतर्क रहें और बचाव के कदमों का पालन करें

 

संभव है कि समय के साथ यह कोरोना महामारी के खात्मे का माध्यम बन जाए। फाइल फोटो

ओमिक्रोन बहुत संक्रामक है। संक्रमण बढ़ेगा तो डेल्टा की तुलना में कमजोर वैरिएंट होने के बावजूद अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में कई सकारात्मक बातों के बावजूद जरूरी है कि सतर्क रहें और बचाव के कदमों का पालन करें।

2019 के आखिरी महीनों में चीन से चले एक पिद्दी से वायरस ने कुछ ही दिनों में कोविड-19 महामारी का रूप धर लिया। दुनिया ने बुरे से बुरा दिन देखा, लेकिन प्रतिकूल हालत में भी मुकाबला जारी रहा। किसी छलिया की तरह महामारी का वायरस रूप बदलता रहा। जिसमें उसकी घातकता और संक्रामकता घटती-बढ़ती रही। इस वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने जो कहर मचाया वह सदियों तक याद रखा जाएगा, लेकिन इसी बीच दुनिया की तैयारियों ने वायरस के मुकाबले प्रतिरोधी क्षमता भी विकसित की। वैक्सीन के रूप में एक ऐसा अमोघ अस्त्र मिला जो महामारी के असर को न्यून करने में कारगर रहा। अब इस वायरस का ओमिक्रोन वैरिएंट चिंता का सबब बन रहा है। दक्षिण अफ्रीका से निकले इस वैरिएंट के बारे अध्ययन बताते हैं कि यह डेल्टा जैसा घातक तो नहीं हैं लेकिन संक्रमण फैलाने के मामले में तीन गुना अधिक है। तभी तो दुनिया में चौथी लहर और भारत में तीसरी लहर के मूल में यही वैरिएंट बनता दिख रहा है। हमारी तैयारियां भी जोरों पर हैं।

देश की बड़ी आबादी अब वैक्सीन के सुरक्षा घेरे में है। देश में हाइब्रिड इम्युनिटी विकसित हो चुकी है। वायरस के नए वैरिएंट तभी बनते हैं जब यह तेजी से संक्रमण फैलाता है। चूंकि अब हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित हो चुका है और जिन्हें अभी वैक्सीन नहीं लगी है उनके समेत पूरा देश महामारी के दौरान शारीरिक दूरी, मास्क के इस्तेमाल जैसी तमाम एहतियात का शिद्दत से अनुपालन नहीं भूला है, ऐसे में अब घातक वैरिएंट आने की आशंकाएं बहुत कम दिखती हैं। तभी तो वायरोलाजिस्ट और महामारीविद 2022 में इस महामारी का अंत देख रहे हैं। उनके अनुसार क्रमिक रूप से असरहीन होता यह वायरस एक दिन सामान्य फ्लू में तब्दील हो सकता है। ऐसे में इंसानों की मजबूत होती तैयारी और स्वत: कमजोर होते वायरस के बीच नए साल में महामारी की दिशा-दशा की पड़ताल आज बड़ा मुद्दा है।

कुछ लोग यह निष्कर्ष दे रहे हैं कि ओमिक्रोन वैरिएंट असल में कोरोना महामारी का कारण बने सार्स कोव-2 वायरस के लिए भस्मासुर साबित हो सकता है। इसे प्राकृतिक टीके की संज्ञा भी दी जा रही है। इसके लिए पहले यह समझना होगा कि वायरस का क्रमिक विकास कैसे होता है? मूलत: कोई भी वायरस बहुत लंबे समय तक तभी टिक पाता है, जब उसकी मारक क्षमता बहुत ज्यादा नहीं होती है। इसकी वजह यह है कि वायरस को फैलने के लिए होस्ट यानी किसी व्यक्ति की जरूरत होती है। यदि वायरस ज्यादा जानलेवा होगा तो उसके होस्ट की मृत्यु जल्दी हो जाएगी और एक सीमा पर पहुंचकर वायरस का प्रसार थम जाएगा। इबोला वायरस इसका उदाहरण हो सकता है। 2003 में कांगो गणराज्य में इबोला वायरस ने कहर बरपाया था। इसमें मृत्यु दर 90 प्रतिशत तक देखी गई थी। इसी कारण से वायरस संक्रामक होने के बावजूद महामारी का रूप नहीं ले पाया था।

ओमिक्रोन भी कुछ हद तक फ्लू के वायरस जैसे ही लक्षण दिखा रहा है। ऐसे में यह उम्मीद लगाई जा रही है कि संभवत: यह महामारी के अंत की शुरुआत है। ओमिक्रोन भस्मासुर साबित हो सकता है, इसके पक्ष में एक और भी अध्ययन आया है। दक्षिण अफ्रीका के विज्ञानियों ने पाया है कि ओमिक्रोन वैरिएंट अब तक के किसी भी वैरिएंट से शरीर में बने इम्यून को मात दे सकता है। यानी डेल्टा से संक्रमित हो चुके व्यक्ति को ओमिक्रोन संक्रमित कर सकता है। लेकिन ओमिक्रोन से संक्रमित हो चुके लोगों में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा नहीं देखा गया है। यह अच्छा संकेत है। यह दिखाता है कि ओमिक्रोन के संक्रमण से शरीर में बनी प्रतिरक्षा शक्ति अन्य वैरिएंट का खतरा कम कर सकती है। जाहिर तौर पर टीका भी ऐसा ही करता है। जिस तेजी से ओमिक्रोन का संक्रमण फैल रहा है, जल्द ही बड़ी आबादी में ऐसी प्रतिरक्षा शक्तिविकसित हो जाएगी, जो उन्हें अन्य वैरिएंट के खतरे से बचाएगी। संभव है कि समय के साथ यह कोरोना महामारी के खात्मे का माध्यम बन जाए।

सवाल यह है कि क्या अभी से ऐसे निष्कर्ष पर पहुंचना सही होगा। हमें अन्य पहलुओं को भी देखना चाहिए। हमें इस अवधारणा से बचना होगा कि ओमिक्रोन एक वैक्सीन की तरह है। मौजूदा किसी भी वैक्सीन से आपके अस्पताल में भर्ती होने या बीमार होने की आशंका नहीं के बराबर है, लेकिन अगर आप ने वैक्सीन नहीं ली है तो ओमिक्रोन से गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका बहुत ज्यादा है। संक्रमितों में पोस्ट कोविड कांप्लिकेशंस की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता। इसीलिए हमें और सरकार को इस लहर से निपटने के लिए टीकाकरण पर विशेष ध्यान देना होगा। विशेष रूप से 15 से 18 वर्ष की युवा आबादी जिन्होंने एक भी डोज नहीं ली है। 60 साल से ऊपर की को-मोर्बिडिटी वाली आबादी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए बूस्टर डोज भी जरूरी है, जिन्हें फिर से एक बार इस लहर से निपटने के लिए फ्रंट फुट पर लड़ना होगा। अगर बढ़ते संक्रमण की लहर के बीच डाक्टरों और नसोर्ं में ब्रेक थ्रू इंफेक्शन हुआ और उन्हें क्वारंटाइन करने की आवश्यकता पड़ी तो यह स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय हो सकता है।