हाई कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर को जारी किया नोटिस, पूछा- क्या मतांतर करा सकते हैं?

 

हाई कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर को जारी किया नोटिस, पूछा- क्या मतांतर करा सकते हैं?

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों की उम्र 18 साल से ज्यादा है और बालिग हैं। दोनों गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया है। विवाह से पहले लड़की का मतांतरण कराया। वह हिंदू हो गई है। उसे नारी निकेतन से मुक्त किया जाए।

ग्वालियर । आर्य समाज शादी काफी चर्चित है। समाज की दिखावा से दूर रहने वाले लोग या फिर जाति प्रथा में विश्वास नहीं रखने वाले लोग अधिकांश आर्य समाज शादी की ओर रुख करते हैं। पर यहां आर्य समाज शादी को लेकर दूसरी हीं बात सामने आयी है दरअसल हाई कोर्ट की युगल पीठ ने उस मामले में आर्य समाज मंदिर गाजियाबाद उत्तर प्रदेश को पार्टी बनाकर नोटिस जारी कर दिए हैं, जिसमें आर्य समाज मंदिर गाजियाबाद ने एक युवती का मतांतरण कर विवाह कराया था। याचिका की सुनवाई 31 जनवरी को संभावित है। वैसे याचिकाकर्ता को मतांतरण के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी थी, लेकिन कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर का पक्ष जानना चाहा है।जानकारी हो कि शिवपुरी जिले के राहुल ने 17 सितंबर 2019 को घर से भागकर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। लड़की के पिता ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। दो साल बाद ये घर वापस लौटे तो थाने में उपस्थित हुए। दोनों विवाह की जानकारी दी, लेकिन गुमशुदगी का केस दुष्कर्म में बदल गया। लड़की ने पिता के साथ जाने से मना कर दिया। शिवपुरी के अपर कलेक्टर ने लड़की को नारी निकेतन भेज दिया। वह नारी निकेतन में रह रही है। राहुल जेल चला गया। जमानत मिलने के बाद वह बाहर आया।

मालूम हो कि राहुल ने पत्नी को नारी निकेतन से मुक्त कराने के लिए हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका की सुनवाई युगल पीठ में हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दोनों दोनों की उम्र 18 साल से ज्यादा है और बालिग हैं। दोनों गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया है। विवाह से पहले लड़की का मतांतरण कराया। वह हिंदू हो गई है। वर्तमान में उसकी पत्नी नारी निकेतन में रह रही है। उसे नारी निकेतन से मुक्त किया जाए। विवाह के प्रमाण भी पेश किए। लड़की भी अपने बयानों में विवाह करना स्वीकार कर चुकी है। दोनों बालिग हैं, कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र हैं। मतांतरण के संबंध में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को जवाब देना है।

क्या है आर्य समाज शादी

ऐसी आर्य समाज शादी क्या होती है और इस शादी को क्या कानूनी मान्यता प्राप्त है। दरअसल जानकारी हो कि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना की गई। इस समाज के मंदिर होते हैं जहां शादी संपन्न कराई जाती है। भारत में आर्य समाज की शादी के लिए एक अधिनियम भी बनाया गया है जिसे आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट, 1937 कहा जाता है। यह अधिनियम आर्य समाज की शादी की वैधता के संबंध में उल्लेख करता है इसलिए यह प्रश्न तो बनता ही नहीं है कि आर्य समाज की शादी वैध है या अवैध।मालूम हो कि अधिनियम से ही यह स्पष्ट होता है कि आर्य समाज में की गई शादियां वैध होती है। वैसी शादियों को कानूनी मान्यता प्राप्त है बस इस कानून में बताए गए नियम और शर्तों का ठीक से पालन किया जाए।

क्या है नियम:-

आर्य समाज की शादियां हिंदू वैदिक विवाह की तरह ही होती हैं। यहां पर विवाह के दोनों पक्षकार पति और पत्नी अग्नि के फेरे लेते हैं। आर्य समाज की शादियां आर्य समाज के मंदिरों में संपन्न की जाती है। यह बात निर्विवाद है कि आर्य समाज मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता है परंतु आर्य समाज को हिंदू धर्म का ही एक अंग माना जाता है।