मप्र में ड्रोन से की जाएगी हाथियों की निगरानी, करंट रोकेगा कदम

 

मप्र में ड्रोन से की जाएगी हाथियों की निगरानी, करंट रोकेगा कदम। फाइल फोटो

जंगलों में घूम रहे 70 से अधिक हाथियों की निगरानी अब ड्रोन से की जाएगी। हाथी बस्तियों और खेतों में रहने वाले किसान और उनके परिवार को नुकसान न पहुंचा सकें इसके लिए ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तार फेंसिंग की जाएगी जिसमें करंट छोड़ा जाएगा।

भोपाल। मध्य प्रदेश के जंगलों में घूम रहे 70 से अधिक हाथियों की निगरानी अब ड्रोन से की जाएगी। हाथी बस्तियों और खेतों में रहने वाले किसान और उनके परिवार को नुकसान न पहुंचा सकें, इसके लिए ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तार फेंसिंग की जाएगी, जिसमें करंट छोड़ा जाएगा। सौर ऊर्जा से उत्पन्न यह करंट सिर्फ झटका देगा। हाथी दल के किसी एक हाथी को कालर आइडी भी लगाया जाएगा, ताकि दल के विचरण की जानकारी मिल सके। प्रदेश में हाथियों के बढ़ते दखल को देखते हुए हाथी विशेषज्ञों ने यह सलाह दी है। केंद्र सरकार के हाथी विशेषज्ञ सहित असम व विभिन्न संस्थाओं के आधा दर्जन विशेषज्ञों ने पिछले दिनों हाथी प्रभावित क्षेत्रों में दो दिन गुजारने के बाद यह सुझाव दिए हैं। 

हाथी विशेषज्ञों का दल गठित 

मध्य प्रदेश में हाथी बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं, साढ़े तीन साल से 45 हाथियों के एक दल ने बांधवगढ़ क्षेत्र में डेरा डाल रखा है। इस अवधि में हाथियों ने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को कुचलकर मार डाला है। दो महीने पहले 25 हाथियों का एक और दल अनूपपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में दाखिल हो गया है। धीरे-धीरे बढ़ रही हाथियों की समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार ने प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक की अध्यक्षता में हाथी विशेषज्ञों का एक दल गठित किया है। जिसमें केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विश्व प्रकृति निधि संगठन, असम सहित अन्य विशेषज्ञ थे। उन्होंने बांधवगढ़ के हाथी प्रभावित क्षेत्र में दो दिन गुजारे हैं। अब यह दल सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा। 

समस्या बनें हाथी

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के रास्ते आने वाले जंगली हाथी मध्य प्रदेश के लिए समस्या बनते जा रहे हैं। प्रदेश के उमरिया व सीधी जिलों में 54 हाथियों ने कई साल से डेरा डाल रखा है। ये हाथी खेतों को बर्बाद कर रहे हैं, घरों को उजाड़ रहे हैं और अब तक अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों को मार चुके हैं। मध्य प्रदेश में हाथी बीते करीब एक दशक से आ रहे हैं, मगर हर साल वे लौट जाते थे, लेकिन कुछ साल पहले आए 40 हाथियों के एक झुंड ने उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ क्षेत्र को स्थाई ठिकाना बना लिया था।