माता वैष्णो देवी भवन हादसा : गोरखपुर के डा अरुण प्रताप के लिए स्मार्ट वाच बनी मौत का कारण, कई श्रद्धालु बीच रास्ते से ही लौटे

 

भवन में भगदड़ मचने का जैसे ही श्रद्धालुओं को पता चला तो कई श्रद्धालु रास्ते ही वापस लौट गए।

डा. अरुण के साथ आए उनके दोस्त ने बताया कि अरूण माता के दर्शनों के लिए अंदर चले गए थे लेकिन वहां उनकी कलई में स्मार्ट वॉच बंधी देख सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वापस भेज दिया। वह स्मार्ट वॉच को खोलने के लिए क्लॉक रूम में चले आए थे।

जम्मू, संवाददाता। माता वैष्णों देवी के भवन में भगदड़ मचने का जैसे ही श्रद्धालुओं को पता चला तो कई श्रद्धालु रास्ते ही वापस लौट गए।इनमें कुछ श्रद्धालु भवन तक पहुंच चुके थे जबकि कुछ वहां पहुंचने ही वाले थे। पठानकोट से आई महिला रेखा देवी ने बताया कि वह अपनी बहन, पति व परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के साथ माता के दर्शनों के लिए आई थी। वह भवन में पहुंच चुके थे कि तभी वहां पता चला कि यहां भगदड़ मचने से कई लोगों की जान चली गई है। ये सुनते ही वे बहुत डर गए और वहां से वापस कटड़ा के लिए आ गए।

रेखा देवी ने बताया कि वे पहले भी माता के दर्शनों के लिए आते रहे हैं। उन्हें दर्शन भी अच्छे से होते रहे हैं लेकिन इस बार पता नहीं ऐसा क्यों हो गया। वहीं दिल्ली से आई अन्य महिला सीता कुमारी ने बताया कि वह भी अपने परिवार के साथ भवन पहुंच गई थी लेकिन वहां का मंजर देख पूरा परिवार बिना दर्शनों के ही वापस कटड़ा आ गया। अब वे वापस अपने घर जा रहे हैं।अगर माता के दोबारा बुलाया तो वे जरूर आएगी।वहीं कटड़ा में भवन से पहुंचे अधिकतर लोगों का यही कहना था कि वे बिना दर्शनों के ही आ गए हैं। भवन में भीड़ बहुत थी।श्राइन बोर्ड के प्रयास भी कम पड़ रहे थे। एक साथ इतनी यात्रा के पहुंचने से वहां स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई है।

मार्ट वॉच बनी डा. अरूण प्रताप की मौत

गोरखपुर से अपने दोस्तों के साथ माता वैष्णों देवी के दर्शनों के लिए आए डा. अरूण प्रताप की मौत का कारण उनकी कलई में बंधी स्मार्ट वॉच बनी। डा. अरुण के साथ आए उनके दोस्त ने बताया कि अरूण माता के दर्शनों के लिए अंदर चले गए थे लेकिन वहां उनकी कलई में स्मार्ट वॉच बंधी देख सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वापस भेज दिया। वह स्मार्ट वॉच को खोलने के लिए क्लॉक रूम में चले आए थे। इस दौरान वहां भगदड़ मच गई और उसमें डा. अरूण भी चपेट में आ गए। इस हादसे के कुछ देर बाद उनके साथी भी अंदर से बाहर दर्शन कर लौट आए थे। उन्हें वहां अरूण नहीं मिला तो वह उन्हें तलाशते रहे। सुबह करीब छह बजे वे जब अस्पताल पहुंचे तो वहां डा. अरुण उन्हें मृत मिले। डा. अरुण का शव उनके दोस्तों के हवाले किया गया।