स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ सपा ज्वाइन करने पर जानिए क्या बोले रामदास आठवले

 

स्वामी प्रसाद मौर्य और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा का दामन छोड़कर सपा ज्वाइन कर ली है। इस पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

नई दिल्ली, एएनआइ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा का दामन छोड़कर सपा ज्वाइन कर ली है। इस पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'स्वामी प्रसाद मौर्य जी पहले बसपा छोड़कर भाजपा में आए थे और अब उन्होंने भाजपा को छोड़कर सपा में जाने का निर्णय लिया है। तो ये उनकी मर्जी है लेकिन उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने से न भाजपा को नुकसान होगा और न ही समाजवादी पार्टी को फायदा होगा।'

चुनाव नजदीक आता देख भाजपा और योगी आदित्यनाथ को भारी झटका देते हुए मंत्री स्वामी प्रसाद और तीन विधायकों ने आज इस्तीफा दे दिया और सपा में शामिल हो गए। योगी आदित्यनाथ सरकार के एक शीर्ष मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने ट्विटर पर अपना इस्तीफा साझा किया। इस्तीफे के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद तीन और विधायकों रोशन लाल वर्मा, बृजेश प्रजापति और भगवती सागर ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी।

योगी सरकार पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने लगाए आरोप

मंगलवार को अपने इस्तीफे का एलान करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मैंने दलितों, पिछड़े वर्गों, किसानों, युवाओं और व्यापारियों के खिलाफ सरकार के रवैये को ध्यान में रखते हुए योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया है। उन्होंने संवाददाताओं से यह भी कहा कि मेरे बाहर निकलने का भाजपा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद स्पष्ट होगा।

ओबीसी वर्ग के बड़े नेता हैं स्वामी प्रसाद मौर्य

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य एक शक्तिशाली ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता और पांच बार के विधायक हैं। मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़ने के बाद 2016 में भाजपा में शामिल हो गए थे। वह अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी का मुकाबला करने के लिए ओबीसी मतदाताओं के एक महत्वपूर्ण वर्ग को आकर्षित करने की भाजपा की योजनाओं के केंद्र में थे।