दिल्ली वालों को एमसीडी की ओर से मिल सकता है करों में राहत का तोहफा

 

दिल्ली वालों को एमसीडी की ओर से मिल सकता है करों में राहत का तोहफा

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में निगमायुक्त द्वारा की गई संपत्तिकर में कर की वृद्धि के प्रस्ताव पूरी तरह खारिज होंगे साथ ही वर्तमान दरों में भी राहत के प्रस्ताव आएंगे। इसके लिए बजट में प्रविधान किए जा सकते हैं।

नई दिल्ली,  संवाददाता। चुनावी वर्ष में दिल्ली नगर निगमों की ओर से जनता को तोहफों की लड़ी लग सकती है। इसी कड़ी में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्थायी समिति के अध्यक्ष जहां 12 जनवरी को तो दक्षिणी निगम के स्थायी समिति के अध्यक्ष 18 जनवरी को सदन की विशेष बैठक में बजट को अंतिम रूप देंगे। खास बात यह होगी कि दक्षिणी निगम में निगमायुक्त द्वारा की गई संपत्तिकर में कर की वृद्धि के प्रस्ताव पूरी तरह खारिज होंगे साथ ही वर्तमान दरों में भी राहत के प्रस्ताव आएंगे। इसके लिए बजट में प्रविधान किए जा सकते हैं। दक्षिणी और उत्तरी निगम के स्थायी समिति अध्यक्ष विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सलाह करके ही बजट को तैयार कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि दक्षिणी निगम के आयुक्त ज्ञानेश भारती ने 23 नंवबर को तो उत्तरी निगम के आयुक्त संजय गोयल ने 25 नंवबर को स्थायी समिति की विशेष बैठक में वर्ष 2021-22 के संशोधित बजट अनुमान और वर्ष 2022-23 के बजट अनुमानों को प्रस्तुत किया था। उत्तरी निगम ने जहां कोई भी नया कर न लगाने का प्रस्ताव दिया था, जबकि दक्षिणी निगम के आयुक्त ने रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तिकर की दरों में प्रस्ताव किया था। चूंकि इसी वर्ष अप्रैल में निगम के आम चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तारुढ़ भाजपा कोई भी नया कर लगाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए निगमायुक्त ज्ञानेश भारती द्वारा प्रस्तावित करों की बढोत्तरी की प्रस्तावों को सिरे से खारिज किए जाने की उम्मीद है। विश्वसनीय सू्त्रों के अनुसार कोई भी नया कर नहीं लगाया जाएगा बल्कि वर्तमान करों में भी रियायत दिए जाने की कोशिश हैं। वर्तमान संपत्तिकर की दरों में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि दक्षिणी निगम में तृतीय निगम मूल्याकंन समिति (एमवीसी) के दरों की वृद्धि को जो लागू न करने का फैसला 31 मार्च तक लागू किया गया था उसे स्थायी समिति के बजट में अगामी सभी वर्षों के लिए लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षा उपकर में जो एक प्रतिशत कर लिया जाता है उसे आयकर की तर्ज पर लिए जाने का प्रविधान किया जाएगा। दरअसल, अभी शिक्षा उपकर फिलहाल संपत्ति के रेटेवल वेल्यू पर लगता है जबकि सत्तारुढ़ दल चाहता है कि सभी छूट पाने के बाद जो कर निर्धारित हो उस पर ही लगे। वहीं, उत्तरी दिल्ली नगर निगम कुछ श्रेणियों में संपत्तिकर घटाने की घोषणा कर सकता है।

कोरोना के बढ़ते मामलों में वर्चुअल हो सकती है सदन की बैठक

कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में बजट की बैठक वर्चुअल हो सकती है। बीते दिनों उत्तरी निगम की स्थायी समिति की बैठक वर्चुअल हुई थी। वर्चुअल करने पर दोनों निगम विचार कर रहे हैं। दक्षिणी निगम में कांग्रेस दल के नेता अभिषेक दत्त भी वर्चुअल बैठक कराने की मांग कर चुके हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) बीके ओबराय (अध्यक्ष, स्थायी समिति, दक्षिणी निगम) का कहना है कि हम कोई भी नया कर लगाने के पक्ष में नहीं हैं। हमारी कोशिश है कि नया कर लगाए बिना लोगों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत दी जाए।

जोगीराम जैन (अध्यक्ष स्थायी समिति, उत्तरी निगम) का कहना है कि निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, हम आंतरिक स्त्रोतों से राजस्व बढ़ाने पर जोर देंगे। कोई भी नया लगाने के पक्ष में हम नहीं है। अगर, दिल्ली सरकार निगमों को उसके हिस्से का फंड दे दें तो उससे सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है।