कालेज व विश्वविद्यालयों के लिए डिजिलाकर अनिवार्य, यूजीसी ने जारी किए निर्देश

 

यूजीसी ने संस्थानों से छात्र-छात्राओं के समस्त शैक्षणिक दस्तावेजों (डाक्यूमेंट) डिजिलाकर के माध्यम से स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के निजी व राजकीय कालेजों व विवि में दाखिले के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी ने संस्थानों से छात्र-छात्राओं के समस्त शैक्षणिक दस्तावेजों (डाक्यूमेंट) डिजिलाकर के माध्यम से स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं।

 संवाददाता, देहरादून: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के निजी व राजकीय कालेजों व विवि में दाखिले के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। यूजीसी ने संस्थानों से छात्र-छात्राओं के समस्त शैक्षणिक दस्तावेजों (डाक्यूमेंट) डिजिलाकर के माध्यम से स्वीकार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कालेज और विवि को डिजिलाकर के माध्यम से ही सभी तरह के डाक्यूमेंट अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।करीब एक सप्ताह पहले यूजीसी की ओर से जारी आदेश की प्रतियां उत्तराखंड के अधिकतर कालेज एवं विवि को प्राप्त हो गई हैं। यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह सिस्टम तैयार करने के लिए कहा है। नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी (एनएडी)की पहुंच बढ़ाने के लिए यूजीसी ने यह कदम उठाया है। उत्तराखंड में 31 राजकीय व निजी विश्वविद्यालय हैं जिनसे करीब 365 उच्च शिक्षा संस्थान संबद्ध हैं। इसके अलावा हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि है। जिससे 14 सहायता प्राप्त अशासकीय कालेज संबद्ध हैं। इन सभी संस्थानों में करीब तीन लाख 25 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। सभी संस्थानों को डिजिलाकर से जोडऩा बड़ी चुनौती है। विशेषकर श्रीदेव सुमन विवि और कुमाऊं विवि से संबद्ध 119 राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अपेक्षाकृत सूचना प्रौद्योगिकी से लैस नहीं हैं।

डिजिलाकर केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलाजी मंत्रालय का प्लेटफार्म है। जहां उच्च शिक्षा संस्थान अपने छात्र-छात्राओं की अंकतालिका, डाटा व अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र रखते हैं। छात्र-छात्राएं भी अब इन डाक्यूमेंट को डाउनलोड कर सकते हैं।

दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल का कहना है कि दून विवि में छात्र-छात्राओं के सभी प्रकार के प्रमाण पत्र व सर्टिफिकेट को डिजिलाकर में सुरक्षित रखने की प्रक्रिया चल रही है। विवि का आइटी सेल इस कार्य में जुटा है। जल्द ही शत प्रतिशत डाक्यूमेंट डिजिलाकर में होंगे। यह व्यवस्था प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पहले ही अमल में लाई जा चुकी है।

श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डा.पीपी ध्यानी का कहना है कि श्रीदेव सुमन विवि की कार्य परिषद की बैठक में विवि से संबद्ध समस्त कालेजों में छात्र-छात्राओं के डाक्यूमेंट डिजिलाकर में सुरक्षित रखने का प्रस्ताव पास किया गया था। इस संबंध में विवि की सूचना प्रौद्योगिकी यूनिट कार्य कर रही है। जल्द ही यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। विवि यूजीसी के नियमों का पूरी तरह पालन करेगा।