सुरक्षा के उपायों से हारेगा कोरोना संक्रमण का हर वैरिएंट, बनें जिम्मेदार नागरिक

किसी भी सतह को न छूने और हाथों को चेहरे पर न लगाने की सलाह दें। फाइल फोटो

भोपाल एम्स के प्रोफेसर बायोमेडिकल साइंसेज डा. सरमन सिंह ने बताया कि बीते दो साल से कोरोना का संक्रमण नए वैरिएंट के रूप में सामने आ रहा है लेकिन घबराने के बजाय यदि संक्रमण से बचने के सभी उपायों का किया जाए पालन तो नहीं है खतरे की आशंका...

शशिकांत तिवारी। कोरोनारोधी टीके की बूस्टर डोज लगने के बाद भी 54 फीसद से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसमें कोई भी वैक्सीन पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो रही है। ऐसे में हम सभी की चिंता और जिम्मेदारी बढ़ गई है। ओमिक्रोन वैरिएंट से भी सिर्फ मास्क और कोविड गाइड लाइन का पालन ही बचाएगा। समस्या यह है कि संक्रमितों की संख्या कम होने पर लोग लापरवाही करने लगते हैं। बड़े-बड़े आयोजन हो रहे हैं और लोग बिना मास्क व शारीरिक दूरी का पालन किए एक जगह इकट्ठा हो रहे हैं।

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यह जरूर है कि ओमिक्रोन वैरिएंट खतरनाक कम है, लेकिन संक्रामक बहुत ज्यादा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूएसए में 26 दिन के भीतर 75 फीसद मरीज इसी वैरिएंट के सामने आए थे। यदि किसी वैरिएंट की संक्रामकता ज्यादा होती है तो ज्यादा लोग संक्रमित भी होते हैं। हर फोरम में एक ही बात कही जा रही है कि कोविड गाइड लाइन का पालन ही बचने का सबसे बड़ा उपाय है।

ओमिक्रोन से बचाव: ओमिक्रोन इतना संक्रामक है कि सभी को मास्क अवश्य लगाना चाहिए साथ ही बचाव के दूसरे इंतजाम भी करने चाहिए, जैसे भीड़भाड़ में नहीं जाना, शारीरिक दूरी का पालन करना और बार-बार साबुन या सेनिटाइजर से हाथ साफ करना। कई राज्यों में रात का कफ्र्यू लगाया जा रहा है, लेकिन यह बहुत कारगर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि ठंड के दिनों में रात में बहुत कम लोग घर से बाहर निकलते हैं। दिन में बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। बच्चों के स्कूल भी खुले हुए हैं। हालांकि यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री जी ने तीन जनवरी से देशभर में 15 से 18 साल तक के किशोरों को टीका लगाने की घोषणा की है। इससे एक उम्मीद जगी है कि बच्चों को भी सुरक्षा चक्र मिल सकेगा। छोटे बच्चों के लिए भी जल्द ही वैक्सीन आने की उम्मीद है और अगले महीने सभी जगह से मंजूरी मिलने की आशा है।

वैक्सीन लगी है तो भी सतर्क रहें: यह अच्छी बात है कि अभी तक कोरोना के किसी भी वैरिएंट में बच्चे कम संक्रमित हुए हैं। बड़ों के मुकाबले बच्चों की मौत भी बहुत कम हुई है। इसकी बड़ी वजह यही है कि बच्चों में बीमारियों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बहुत अच्छी होती है। इसके बाद भी बच्चे हों या बड़े, भले ही किसी को बूस्टर डोज लग चुका हो, वैक्सीन किसी भी कंपनी की लगी हो, लेकिन अतिविश्वास में न रहें और बचाव के सारे उपाय अपनाते रहें।

एंटीबाडी भी हो रही है नाकाम: हम टीका लगाकर अपने शरीर में एंटीबाडी बढ़ाते हैं, लेकिन यह एंटीबाडी ओमिक्रोन को न्यूट्रलाइज नहीं कर पा रही है। ऐसे में एंटीबाडी होने का भी बहुत ज्यादा मतलब नहीं रहेगा। जिन लोगों को पहले से कोरोना हो चुका है, हृदय, छाती या किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें इन दिनों विशेष सावधानी रखने की जरूरत है। ओमिक्रोन की संक्रामकता ज्यादा है, इसलिए लोग भीड़ में जाने से बचें। घर के जो लोग नियमित तौर पर बाहर जाते हैं, उनसे घर में उन लोगों को खतरा है, जिन्हें टीका नहीं लगा है या जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। घर से बाहर जाने वाले व्यक्ति को हो सकता है कि ज्यादा लक्षण न दिखें, लेकिन जिसकी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी नहीं है उसकी हालत बिगड़ सकती है।

बनें जिम्मेदार नागरिक: कोरोना की दो लहरों का सामना करने के बाद भी अभी हम लोग कोरोना संक्रमण को लेकर गंभीर नहीं हैं। जब तक सख्ती नहीं की जाती है, हम मास्क लगाने से कतराते हैं। यदि हम बचाव के उपाय अपनाएंगे तो स्वयं के साथ समाज को भी सुरक्षित रखेंगे। बुजुर्ग और दूसरी तरह की बीमारी वाले लोगों को खतरा ज्यादा है। इसलिए इनको बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। होता क्या है कि जिन्हें वैक्सीन लगी होती है, उन्हें बहुत ही हल्के लक्षण आते हैं। कई बार उन्हें पता ही नहीं चलता है, लेकिन उनसे दूसरों को संक्र्रमण हो जाता है। इसलिए यह मानकर चलना चाहिए कि कोरोना से हम पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं।

जांच और उपचार में न करें देरी: फरवरी में ओमिक्रोन के चलते मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। बचाव के लिए जरूरी है कि हल्के लक्षण दिखने पर फौरन क्वारंटाइन हो जाएं और कोरोना की जांच कराएं। डाक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न खाएं। होम आइसोलेशन में रहने के दौरान खानपान अच्छा रखें। आक्सीजन का स्तर 94 फीसद से कम नहीं होना चाहिए। वैक्सीन कोई भी हो, लेकिन दोनों डोज अवश्य लगवाएं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायराइड से पीड़ित मरीज अपनी दवाई नियमित तौर पर जारी रखें। बच्चों को यह जरूर सिखाएं कि बाहर जाने पर क्या सावधानी रखनी है। किसी भी सतह को न छूने और हाथों को चेहरे पर न लगाने की सलाह दें।