इस मंदिर पर चढ़ाए जाते हैं 'पालना', जानिए आखिर क्या है वजह

 

इस मंदिर पर चढ़ाए जाते हैं 'पालना', जानिए आखिर क्या है वजह। फाइल फोटो

रीआद्या शक्ति माता के मंदिर पर निसंतान दंपती जब संतान को लेकर मन्नत मांगते हैं इच्छा पूरी होती है तो वह यहां आकर पालना चढ़ाते हैं। हम बात कर रहे हैं उदयपुर जिले के झाड़ोल उपखंड क्षेत्र के गोगला स्थित प्रसिद्ध तीर्थ श्री आद्या शक्ति माताजी मंदिर की।

उदयपुर। दरवाजे पर विराजे सिंहों को देखकर हर कोई समझ सकता है कि यह जरूर शक्ति स्थल है, किन्तु अंदर और बाहर लटके सैकड़ों लकड़ी के झूलों (पालना) को देखकर आश्चर्य अवश्य होता है। यहां आकर पता चला कि श्रीआद्या शक्ति माता के मंदिर पर नि:संतान दंपती जब संतान को लेकर मन्नत मांगते हैं और उनकी इच्छा पूरी होती है तो वह यहां आकर पालना चढ़ाते हैं। हम बात कर रहे हैं उदयपुर जिले के झाड़ोल उपखंड क्षेत्र के गोगला स्थित प्रसिद्ध तीर्थ श्री आद्या शक्ति माताजी मंदिर की। उदयपुर से लगभग 56 किलोमीटर तथा झाड़ोल उपखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर आदिवासी क्षेत्र के इस शक्ति पीठ पर हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी मन्नत मांगने जाते हैं। मानसी नदी के एक छोर पर बने इस शक्ति स्थल पर यूं तो हर रोज भक्त पहुंचते हैं, लेकिन हर रविवार को भक्तों की यहां विशेष भीड़ रहती है। यहां संतानहीन ही नहीं, बल्कि अन्य परेशानियों से ग्रसित लोग कष्ट निवारण के लिए पहुंचते हैं। भक्तों को यहां रहने, नाश्ता, भोजन तथा बिस्तर की व्यवस्था जन सहयोग से किया जाता है। 

यहां होती है विशेष पूजा

यूं तो साल भर यहां भक्तों की पहुंच बनी रहती है, लेकिन साल के कुछ विशेष दिन हैं, जब यहां विशेष समारोह आयोजित होते हैं और भक्तों की भीड़ रहती है। इनमें दीपावली पूजा, कार्तिक पूर्णिमा, होली, धुलेंडी, चैत्री बीज, चैत्री नवरात्रि, वैशाखी पूर्णिमा, भादवी बीज, नवरात्रि स्थापना, जन्माष्टमी, जलझूलनी एकादशी शामिल हैं। इसके अलावा हर पूर्णिमा पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के मुख्य पुजारी प्रकाश दवेर बताते हैं कि गोगला में माता आद्याशक्ति के प्रति आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोग ही नहीं, बल्कि आसपास जिलों के लोग भी पहुंचते हैं। मां आद्या शक्ति में हर धर्म-जाति के लोगों की आस्था है, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। मां आद्या के भक्त मोहम्मद शकील बताते हैं कि उन्हें मां आद्या में विश्वास है। उनकी आस्था की वजह से उनका कारोबार में चहुंमुखी रूप से विस्तार हुआ है। वह हर महीने या पंद्रह दिन में एक बार अवश्य मां के दर्शन करने परिवार सहित पहुंचते हैं।

चमत्कार की चर्चा हर ग्रामीण के जुबान पर

गोगला के हर ग्रामीण की जुबान पर मां आद्याशक्ति के चमत्कार की चर्चा है। वह बताते हैं कि किस तरह यहां आने वाले हर रोगी की समस्या का समाधान होता है। निसंतान ही नहीं, बल्कि ऊपरी हवा यानी भूत-प्रेत संबंधी व्यधा, दिव्यांग लोगों की समस्या का निवारण होता है। इसके लिए उदयपुर संभाग ही नहीं, दूरस्थ इलाकों के लोग भी यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त यदि इस मंदिर की ग्यारह बार परिक्रमा करने के बाद कोई मन्नत मांगे तो वह अवश्य पूरी होती है।

माता आद्या के लिए बनाया विशेष मंदिर

गोगला में मां आद्या की मूल स्थल बेहद ही छोटा है। जो लगभग छह वर्ग फिट का होगा। किन्तु बाद में पुजारी प्रकाश दवेर की पहल पर जन सहयोग से भव्य शिखर मंदिर का निर्माण कराया गया। स्वर्ण कलश वाले इस मंदिर में चांदी के सिंहासन पर माता की प्रतिमा विराजित है। यह मंदिर दो दशक पहले ही बनवाया गया। यह मंदिर गांव के मध्य में स्थित है, लेकिन एक किलोमीटर पहले मुख्य सड़क पर जनसहयोग से ग्रामीणों ने विशाल सिंहद्वार का निर्माण कराया, जो इसकी पहचान है। मार्बल पत्थर से बना सिंहद्वारा भी बेहद आकर्षक है।