चार दिन पहले तय हो गया था पीएम का रूट, पंजाब पुलिस को थी पूरी जानकारी, सामने आई सनसनीखेज जानकारियां

 



बठिंडा से फिरोजपुर के रास्ते में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक को लेकर स्थिति साफ होने लगी है।

प्रधानमंत्री के हेलीकाप्टर से रैली स्थल पर जाने के तय प्लान के अलावा सड़क मार्ग के वैकल्पिक रूट चार दिन पहले ही तय कर लिए गए थे। एक दिन पहले पंजाब पुलिस और एसपीजी ने पूरे मार्ग पर रिहर्सल भी कर ली थी।

नई दिल्ली। बठिंडा से फिरोजपुर के रास्ते में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक को लेकर स्थिति साफ होने लगी है। प्रधानमंत्री के हेलीकाप्टर से रैली स्थल पर जाने के तय प्लान के अलावा सड़क मार्ग के वैकल्पिक रूट चार दिन पहले ही तय कर लिए गए थे। इतना ही नहीं एक दिन पहले पंजाब पुलिस और एसपीजी ने पूरे मार्ग पर रिहर्सल भी कर ली थी। यह भी साफ हो गया है कि खुद पंजाब के डीजीपी ने सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री के काफिले को जाने की हरी झंडी दी थी। 

जिम्मेदारी से बच नहीं सकती पंजाब पुलिस

प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर तय प्रोटोकाल के हिसाब से चूक के लिए पंजाब पुलिस अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के अनुसार, गृह मंत्रालय ने इस मामले में पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है और जल्द ही इस पर कड़े और बड़े फैसले लिए जाएंगे।

सुरक्षा इंतजाम पर हुआ था मंथन

प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, बठिंडा से फिरोजपुर के बीच वैकल्पिक सड़क मार्ग से जाने के लिए पंजाब पुलिस और एसपीजी के बीच एक और दो जनवरी को हुई एडवांस सिक्यूरिटी लाइजनिंग (एएसएल) की बैठक में सुरक्षा इंतजाम को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक में खुफिया रिपोर्टों पर विचार किया गया था जिनमें प्रधानमंत्री के काफिले को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की बात कही गई थी।

अचानक नहीं बना था प्‍लान

इसके आधार पर एएसएल रिपोर्ट में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करने पर जोर दिया गया था। एएसएल बैठक के बाद चार जनवरी को पूरे रूट पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रिहर्सल भी की गई थी। इससे साफ है कि बठिंडा से फिरोजपुर तक सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री का प्लान अचानक नहीं बना था, बल्कि पहले से इसकी पूरी तैयारी थी।

पंजाब पुलिस महानिदेशक ने दी थी हरी झंडी

सूत्रों के अनुसार, खराब मौसम के कारण हेलीकाप्टर से प्रधानमंत्री के जाने के संभावना नहीं होने के बाद एसपीजी के महानिदेशक ने पंजाब पुलिस के महानिदेशक से सड़क के रास्ते प्रधानमंत्री की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए बात की थी। पंजाब पुलिस महानिदेशक से हरी झंडी मिलने के बाद ही एसपीजी ने सड़क से जाने की योजना बनाई थी।

अगुआई कर रहे थे बठिंडा के एसएसपी

पंजाब पुलिस की पूरी तैयारी में साझेदारी को इस बात से समझा जा सकता है कि बठिंडा से फिरोजपुर जिले की सीमा और फिरोजपुर जिले की सीमा से वापस बठिंडा तक प्रधानमंत्री के काफिले की अगुआई बठिंडा के एसएसपी कर रहे थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा तैयारियों को लेकर पंजाब पुलिस की आंतरिक बातचीत में रास्ते में किसानों के प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के काफिले को रोकने की उनकी कोशिश और उन्हें रोकने के लिए किए जाने वाले उपाय जैसे मुद्दे शामिल हैं।

जिम्‍मेदारी से बच नहीं सकती है राज्‍य सरकार, ये हैं कानूनी पहलू

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, एसपीजी की ब्लू बुक के पहले चैप्टर के पहले रूल में ही स्पष्ट है कि किसी भी राज्य में यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होगी और एसपीजी की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री को नजदीकी सुरक्षा मुहैया कराने की रहेगी। चैप्टर एक के ही दूसरे रूल में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा इंतजाम राज्य पुलिस करेगी। इसी चैप्टर के पांचवें रूल में स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए तैयार इन रूल्स को अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी राज्य के पुलिस महानिदेशक की होगी।

उठ रहे ये सवाल

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के लिए पूरी तरह से पंजाब पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सड़क पर किसानों की मौजूदगी की जानकारी एसपीजी को नहीं दी गई। यदि यह जानकारी समय पर मिल जाती तो प्रधानमंत्री के काफिले को पुल से पहले ही रोका जा सकता था।

रास्ते में नहीं थे सुरक्षा के इंतजाम

...यहां तक कि पुल पर प्रधानमंत्री के काफिले में फंसे होने के बावजूद वहां मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को हटाने की कोशिश नहीं की जबकि इस बीच भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। यही नहीं, एएसएल में लिए गए फैसले के अनुरूप रास्ते में पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई थी और खतरे की खुफिया जानकारी होने के बावजूद बहुत ही कम संख्या में पुलिस जवान तैनात दिखे। प्रधानमंत्री के काफिले में पुलिस महानिदेशक और मुख्य सचिव की गैरहाजिरी भी सीधे तौर पर ब्लू बुक के रूल का उल्लंघन है।