दिल्ली मंडल ट्रेनों की रेक संरचना के लिए कर रहा खास प्रयास, कोच संख्या में भी होगी समानता

 



रेक की संरचना में किया जा रहा है बदलाव, जरूरत के अनुसार एक-दूसरे में होगा इस्तेमाल।

नई पटरी बिछाने और विद्युतीकरण के साथ ही पुरानी पटरियों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रेनों की रेक संरचना में समानता लाने के प्रयास हो रहे हैं। अलग-अलग श्रेणी के कोच की संख्या एक बराबर रखी जाएगी।

नई दिल्ली । ट्रेनों को समय पर चलाना रेल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अक्सर ट्रेनें विलंब होती हैं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। नई पटरी बिछाने और विद्युतीकरण के साथ ही पुरानी पटरियों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रेनों की रेक संरचना में समानता लाने के प्रयास हो रहे हैं। अलग-अलग श्रेणी के कोच की संख्या एक बराबर रखी जाएगी। इससे जरूरत के अनुसार किसी भी ट्रेन में रेक का इस्तेमाल हो सकेगा।

वर्तमान व्यवस्था में प्रत्येक ट्रेन के लिए अलग रेक निर्धारित होता है। यदि किसी कारणवश कोई ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुंचने में ज्यादा विलंब हो जाती है तो वापसी दिशा में रवाना होने में भी देरी की संभावना रहती है। दरअसल ट्रेन के गंतव्य पर पहुंचने के बाद रेक को रखरखाव के लिए वाशिंग लाइन में ले जाया जाता है। जहां साफ-सफाई और जरूरी मरम्मत की जाती है। प्राथमिक रखरखाव वाली ट्रेन की सफाई, जांच व जरूरी मरम्मत में कम से कम पांच घंटे का समय लगता है। पूरी तरह से जांच के बाद उसे वापसी दिशा में रवाना किया जाता है। इस स्थिति में ज्यादा विलंब से आने वाली ट्रेन वापसी दिशा के लिए भी देर से रवाना होती है। सर्दी के मौसम में कोहरे का प्रकोप बढ़ने पर इस तरह की समस्या ज्यादा आती है।

दिल्ली मंडल में तेजी से चल रहा है काम

अधिकारियों का कहना है कि अभी सभी ट्रेनों की कोच की संख्या में अंतर है। इस वजह से ट्रेन के लिए निर्धारित रेक का ही इस्तेमाल किया जाता है। यदि रेक एक समान होंगे तो यह बाध्यता खत्म हो जाएगी। फिर इसे जरूरत के अनुसार दूसरी ट्रेन में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि कोई ट्रेन ज्यादा विलंब से आती है तो वापसी दिशा में समय पर रवाना करने के लिए यार्ड में उपलब्ध रेक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस दिशा में काम शुरू हो गया है। दिल्ली मंडल ने अबतक लंबी दूरी की सात एक्सप्रेस ट्रेनों में यह काम पूरा कर लिया है। आने वाले दिनों में कुछ और ट्रेनों में यह बदलाव हो जाएगा। इनमें कुल कोच संख्या के साथ ही जनरल, स्लीपर व वातानुकूलित श्रेणी के कोच की संख्या बराबर होगी।

इन ट्रेनों की रेक संरचना में समानता लाई गई है

आनंद विहार टर्मिनल-रक्सौल सद्भावना एक्स्प्रेस (14008),आनंद विहार टर्मिनल-सुल्तानपुर सद्भावना एक्सप्रेस (14014), आनंद विहार टर्मिनल-रक्सौल सद्भावना एक्स्प्रेस (14016), आनंद विहार टर्मिनल-रक्सौल सद्भावना एक्स्प्रेस (14018), आनंद विहार टर्मिनल-सीतामढ़ी लिच्छवी एक्सप्रेस (14006), पुरानी दिल्ली-आजमगढ़ कैफियत एक्सप्रेस (12226) और पुरानी दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा जम्मू मेल (14033)।