आइपीएस वाई पूरन कुमार का एसीएस होम पर पक्षपाती जांच रिपोर्ट देने का आरोप, जानें क्या है पूरा मामला

 

हरियाणा के वरिष्ठ आइपीएस वाई पूरन कुमार व हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

हरियाणा के वरिष्ठ आइपीएस अफसर वाई पूरन कुमार ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव आइपीएस अधिकारी राजीव अरोड़ा पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने हाई कोर्ट से जांच आइएएस या डीजीपी को सौंपने की मांग की है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा कैडर के आइपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा पर भेदभावपूर्ण तरीका अपनाकर पूर्व डीजीपी मनोज यादव के पक्ष में जांच रिपोर्ट देने का आरोप लगाया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद मामले को सात अप्रैल तक स्थगित करने का आदेश दिया।

कुमार ने कहा कि अरोड़ा ने पूर्व डीजीपी यादव के खिलाफ कार्रवाई की उनकी मांग खारिज कर जांच के नियमों को अनदेखा किया है। उनकी शिकायत पर जांच बेढंग से व जल्दबाजी में की गई है। हाई कोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने यादव के खिलाफ अपनी शिकायत की जांच नए सिरे से किसी वरिष्ठ आइएएस या डीजीपी से करवाने का आग्रह किया है।

याचिका में कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि अरोड़ा व पूर्व मुख्य सचिव ने यादव को बचाने के लिए मई माह में उनकी पत्नी जो हरियाणा कैडर की वरिष्ठ आइएएस अधिकारी हैं, उन्हें बुलाकर धमकी दी थी कि वह अपने पति को यादव के खिलाफ शिकायत या एफआइआर न करने को कहें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसके भयंकर परिणाम होंगे। उनकी पत्नी ने मुख्य सचिव व केंद्रीय कार्मिक विभाग को इस बाबत पत्र भी लिखा था।

बुधवार को हाई कोर्ट के जस्टिस राजीव सेहरावत ने याची को सलाह दी कि वह इस बाबत केंद्र प्रशासनिक अधिकरण या अन्य उपयुक्त स्तर पर अप्रोच क्यों नहीं कर रहे। इसी के साथ हाई कोर्ट ने इस मामले में कोई आदेश जारी न करते हुए मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक स्थगित कर दी। कुमार ने इस मामले में शिकायत पर कार्रवाई न करने के कारण पहले अतिरिक्त गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की हुई है।

हाई कोर्ट ने 18 मई को डीजीपी के खिलाफ उनकी एक याचिका का निपटारा करते हुए एसीएस को तीन महीने में शिकायत पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी एसीएस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। वाई पूरन कुमार ने अवमानना याचिका में एसीएस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हाई कोर्ट के जस्टिस एएस ग्रेवाल ने याचिका का निपटारा करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वाई पूरन कुमार की जितनी भी शिकायत उनके कार्यालय में विचाराधीन हैं, उनका तीन माह के भीतर निपटारा सुनिश्चित करें। 47 साल के आइपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने अपनी याचिका में गृह सचिव को आदेश देने की मांग की थी कि वह डीजीपी के खिलाफ उनकी शिकायतों पर फैसला करें। अधिकारी के अनुसार, तत्कालीन डीजीपी मनोज यादव द्वारा जुलाई 2020 से उन्हें लक्षित किया जा रहा था और उनके साथ भेदभाव पर भेदभाव किया जाता रहा है।