प्रख्यात वायरोलाजिस्ट ने ओमिक्रोन से निपटने की तैयारी को बताया बेहतर, बच्चों को स्कूल भेजने के मसले पर कही यह बात

 



बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए, उनमें गंभीर संक्रमण नहीं होता : डा. कंग

प्रख्यात वायरोलाजिस्ट ने कोरोना के वैरिएंट से निपटने की भारत की तैयारी को बताया बेहतर। डा. कंग ने कहा कि जैसा कि दक्षिण अफ्रीका में देखने को मिला है ओमिक्रोन वैरिएंट कोरोना के अन्य वैरिएंट की तुलना में कम गंभीर लग रहा है।

नई दिल्ली, एएनआइ।  देश की जानी मानी वायरोलाजिस्ट यानी विषाणु विज्ञानी डा. गगनदीप कंग ने कहा है कि बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए, क्योंकि उनमें कोरोना का गंभीर संक्रमण नहीं होता। डा. कंग का यह बयान ऐसे समय में आया है जबकि 15-18 साल के किशोरों का टीकाकरण तीन जनवरी से शुरू हो रहा है। एएनआइ के साथ बातचीत में डा. कंग ने कहा, 'मेरा मानना है कि हमें बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए, क्योंकि आमतौर पर बच्चों में कोरोना का गंभीर संक्रमण नहीं होता है। स्कूल की कक्षाओं और अपने साथियों के साथ बातचीत में बच्चे जो सीखते हैं और उन्हें जो शिक्षा मिलती है वह स्कूल जाने पर संक्रमित होने के मामूली जोखिम की तुलना में बहुत ज्यादा फायदेमंद होती है।' उन्होंने आगे कहा, 'बच्चों में सौभाग्य से आमतौर पर सार्स-सीओवी-2 का गंभीर संक्रमण नहीं होता है। बच्चों के लंबे समय तक संक्रमित होने का खतरा है, लेकिन उनके गंभीर रूप से बीमार पड़ने की संभावना बहुत कम होती है, खासकर स्वस्थ बच्चों के।'

डा. कंग ने यह भी कहा कि जैसा कि दक्षिण अफ्रीका में देखने को मिला है, ओमिक्रोन वैरिएंट कोरोना के अन्य वैरिएंट की तुलना में कम गंभीर लग रहा है। इसकी मुख्य वजह यह हो सकती है कि ज्यादातर आबादी संक्रमित हो चुकी है या उसका टीकाकरण हो चुका है। इसलिए डेल्टा की तुलना में ओक्रिोन ज्यादा चिंताजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को कोरोना के साथ जीना सीखना होगा, क्योंकि वायरस के नए वैरिएंट के उभरने की संभावना है। ओमिक्रोन वैरिएंट के बढ़ते खतरे के बीच उन्होंने यह भी कहा कि देश कोरोना वायरस से निपटने के लिए अच्छी तरह तैयार है। आज हम बेहतर स्थिति में हैं डा. कंग ने कहा कि हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दो साल पहले की तुलना में आज हम बेहतर स्थिति में हैं।

महामारी से लड़ने के लिए हमारे पास बेहतर हथियार हैं। जांच को लेकर हमारी समझ बढ़ी है। हम प्रभावी इलाज के बारे में जान गए हैं और हमें यह भी पता है कि टीके का किस तरह से प्रभावी उपयोग करना है। महामारी की लहरे आती रहेंगी उन्होंने कहा कि वायरस की लहरें आती रहेंगी। तीसरी या चौथी या पांचवीं लहर आएगी। परंतु, हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हालात उसी तरह के होंगे जैसे पहली और दूसरी लहर में हुए थे। पहली और दूसरी लहर में हमारा सामना पहली एक बहुत ही गंभीर वायरस से हुआ था। अब हालात बदल गए हैं। अब हम यह देखते हैं कि संक्रमण कितना गंभीर है। नए वैरिएंट उभरेंगे और हमें उन पर नजर रखनी होगी।