चक्रवात 'यास' से गंगासागर के कपिल मुनि मंदिर को हो रहा है भारी नुकसान, ‘जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत’

 

चक्रवात 'यास' से गंगासागर के कपिल मुनि मंदिर को हो रहा है भारी नुकसान

गंगासागर के कपिल मुनि मंदिर को एक के बाद एक आ रहे चक्रवात से भारी नुकसान पहुंच रहा है। मंदिर के महंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संजय दास ने कहा कि चक्रवात यास से मंदिर व इससे संलग्न धर्मशाला जलमग्न हो गई थी।

जागरण संवाददाता, गंगासागर: गंगासागर के कपिल मुनि मंदिर को एक के बाद एक आ रहे चक्रवात से भारी नुकसान पहुंच रहा है। मंदिर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।मंदिर के महंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संजय दास ने कहा कि चक्रवात 'यास' से मंदिर व इससे संलग्न धर्मशाला जलमग्न हो गई थी। इससे मंदिर परिसर को काफी नुकसान पहुंचा। दूसरा, समुद्र का पानी भी तेजी से मंदिर की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र तट से मंदिर का फासला अब महज 300-350 मीटर रह गया है।

हर साल डूब रहा मंदिर का बड़ा हिस्सा

एक रिपोर्ट के मुताबिक गंगासागर में प्रत्येक साल समुद्र का पानी 100-200 फीट के क्षेत्र को अपनी आगोश में लेता जा रहा है। ऐसे में मंदिर को बचाने के लिए अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पुराने मंदिर की तरह यह मंदिर भी जल समाधि ले लेगा। संजय दास ने आगे कहा कि बंगाल की ममता सरकार अपने स्तर पर कदम उठा रही है। केंद्र को भी इसमें आगे आना चाहिए। गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करने की दीर्घकालीन मांग पर संजय दास ने कहा कि गंगासागर मेला कुंभ के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। केंद्र को इसे अविलंब राष्ट्रीय मेला घोषित कर देना चाहिए। इससे इस मेले को केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता भी मिलने लगेगी, जिससे सागर द्वीप का भी काफी तेजी से विकास होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता

गौरतलब है कि गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है। रेडियो सोसाइटी आफ ग्रेट ब्रिटेन ने सागर द्वीप को खास पहचान कोड 'एएस 153' से सम्मानित किया है। सागर द्वीप को कुंभ के बाद भारत के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक मेले के आयोजन के लिए यह ख्याति हासिल हुई है। अब यह विश्व के उन 250 द्वीपों में शामिल हो गया है, जिन्हें यह खास कोड प्राप्त है। हैम रेडियो वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब की ओर से इस कोड के लिए आवेदन भेजा गया था। क्लब के सचिव अंबरीश नाग बिश्वास ने कहा-' गंगासागर मेले को भले ही अभी तक राष्ट्रीय मेले का दर्जा नहीं मिल प्राप्त हुआ हो, लेकिन इसे सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने से पूरी दुनिया के लोग इसके बारे में जान पाएंगे।