बीएचयू के कुलपति प्रो.सुधीर कुमार जैन ने लंका स्थित चाची की दुकान पहुंचकर बनारसी कचौड़ी का स्‍वाद चखा

 

बीएचयू के कुलपति प्रो.सुधीर के जैन बनारस की गलियों व यहां के पकवान का आनंद ले रहे हैं।

बीएचयू के कुलपति प्रो.सुधीर के जैन बनारस की गलियों व यहां के पकवान का आनंद ले रहे हैं। कुलपति बनारसीपन में रम रहे है। सोमवार को सुबह लंका स्थित चाची की दुकान में कचौड़ी खाई। वाराणसी मं लंका स्थित इस दुकान सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ रहती है।

वाराणसी, इंटरनेट डेस्‍क। बीएचयू के कुलपति प्रो.सुधीर के जैन बनारस की गलियों व यहां के पकवान का आनंद ले रहे हैं। कुलपति बनारसीपन में रम रहे है। सोमवार को सुबह लंका स्थित चाची की दुकान में कचौड़ी खाई। वाराणसी मं लंका स्थित इस दुकान सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ रहती है। यहां कचौड़ी- जलेबी और समोसा खाने के लिए लोग आते हैं। वाराणसी आने वाले प्रसिद्ध लोग चाची के यहां कचौड़ी, जलेबी और समोसा खाने के बाद पास ही में पहलवान लस्‍सी के यहां लस्‍सी का स्‍वाद लेते हैं।स्व. छन्नी देवी ( चाची उर्फ चचिया ) बेटा कैलाश यादव दुकान चलाते हैं। लंका रविदास चौराहे के पास संकटमोचन मार्ग पर कोने में चाची उर्फ चचिया की जलेबी और कचौड़ी की दुकान है। यहां चाची की जलेबी और कचौड़ी से ज्यादा स्वादिष्ट लोगों को उसकी गालियां लगती थी। शहर के बड़े बड़े प्रतिष्ठित और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉक्टर और प्रोफेसर के साथ ही मंत्री और विधायक भी लंका पर चाची की कचौड़ी खाने आते थे। चाची की गालियों में भी प्यार और आशीर्वाद था जिसके कारण लोग उसे परेशान करते तो वो गालियां देती थी। लोगों का कहना है कि अगर किसी काम के लिए जाने से पहले अगर चाची गाली दे देती तो वह कार्य पूर्ण हो जाता था। चाची की गलियां खाने के लिए विदेशों में रहने वाले लोग परिवार के साथ आकर उसकी गालियां खाते और हंसते हुए चले जाते थे ।