श्रीलंका ने भारत की मदद से शुरू की लग्जरी ट्रेन सेवा, तमिल बहुल जाफना जिले को राजधानी कोलंबो से जोड़ेगी

 

श्रीलंका ने भारत की तरफ से दी गई ऋण सहायता की मदद से एक लग्जरी ट्रेन सेवा शुरू की है।

श्रीलंका ने भारत की तरफ से दी गई ऋण सहायता की मदद से देश के तमिल बहुल जाफना जिले को राजधानी कोलंबो से जोड़ने वाली लग्जरी ट्रेन सेवा शुरू की है। श्रीलंका की परिवहन मंत्री ने इसके लिए भारत सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है।

कोलंबो, पीटीआइ। श्रीलंका ने भारत की तरफ से दी गई ऋण सहायता की मदद से देश के तमिल बहुल जाफना जिले को राजधानी कोलंबो से जोड़ने वाली लग्जरी ट्रेन सेवा शुरू की है। श्रीलंका की परिवहन मंत्री ने महामारी के बीच सहयोग जारी रखने के लिए भारत सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है। इंटरसिटी ट्रेन सेवा की शुरुआत रविवार को कोलंबो के माउंट लाविनिया उपनगर से उत्तर में जाफना के कांकेसंथुराई तटीय उपनगर तक के लिए हुई।

दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 386 किलोमीटर है। श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग ने इसे भारत-श्रीलंका संबंधों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उच्चायोग ने ट्वीट किया, 'रेलवे के बुनियादी ढांचे को और मजबूती दी गई!! उत्तरी प्रांत के लिए आज शुरू की गई ट्रेन सेवा श्रीलंका के साथ भारत की विकास साझेदारी के दो प्रमुख स्तंभों को दर्शाती है। ये हैं बुनियादी ढांचा विकास और देशव्यापी दृष्टि।'

भारत ने ऋण सुविधा के तहत श्रीलंका को एसी डीजल मल्टीपल यूनिट (एसी डीएमयू) दी थी। श्रीलंका की परिवहन मंत्री पवित्रा वन्नियाराच्ची ने उद्घाटन कार्यक्रम के बाद ट्रेन में यात्रा की। भारत के उप उच्चायुक्त विनोद के. जैकब ने कोलंबो फोर्ट स्टेशन पर उनका स्वागत किया। जैकब ने कहा, 'यह ट्रेन सेवा लोगों को आवागमन की सुविधा प्रदान करेगी और दोनों देशों के बीच परस्पर लाभकारी सहयोग पर बल देगी।'

भारतीय मिशन ने एक बयान में बताया कि श्रीलंका के विकास कायरें में भारत का कुल योगदान 3.5 अरब डालर (259.1 अरब रुपये) से अधिक है। इसमें करीब 57 करोड़ डालर (42.24 अरब रुपये) की विशुद्ध रूप से अनुदान परियोजनाएं शामिल हैं।

उल्‍लेखनीय है कि भारत की ओर से यह मदद ऐसे वक्‍त में की गई है जब श्रीलंका में मुद्रास्‍फीति रिकार्ड 11.1 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यही नहीं श्रीलंका पर दिवालिया होने का खतरा मंडराने लगा है। पिछले साल 30 अगस्त को देश की मुद्रा का जबर्दस्त अवमूल्यन होने के बाद श्रीलंका सरकार ने राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल घोषित किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2019 तक श्रीलंका का विदेशी कर्ज बढ़कर जीडीपी का 42.6 प्रतिशत हो गया है।