भारत-पाक राजनयिक संबंध: दोनों देशों में बंद कैदियों की सूची का आदान-प्रदान, जल्द रिहाई के आसार

 

भारत और पाक ने किया कैदियों की सूची का आदान-प्रदान (एएनआई, फाइल फोटो)

भारत-पाक ने राजनयिक संबंधों के माध्यम से वहां की जेलों में बंद कैदियों की सूची का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2008 के दौरान हुए समझौते के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए है लिस्ट का आदान-प्रदान हुआ है।

नई दिल्ली, एजेंसी: आज नए साल के पहले दिन भारत और पाकिस्तान ने अपने रिश्ते को सकारात्मक मोड़ दिया। दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के माध्यम से वहां की जेलों में बंद कैदियों की सूची का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2008 के दौरान हुए समझौते के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए है लिस्ट का आदान-प्रदान हुआ है। समझौते के तहत हर साल एक जनवरी और एक जुलाई को इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है।

भारत के तरफ से पाकिस्तान को सौंपी गई सूची में कुल 355 कैदियों के नाम शामिल हैं। जिनमें से 282 पाकिस्तानी नागरिक कैदी और 73 मछुआरे शामिल है। वहीं, पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में बंद 51 नागरिक कैदियों और 577 मछुआरों की सूची साझा की है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान की हिरासत में बंद कैदी यह तो भारतीय नागरिक हैं। या फिर उन्हें भारतीय नागरिक करार दिया गया है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत से नागरिक कैदियों, लापता भारतीय रक्षा कर्मियों और मछुआरों को उनकी नावों के साथ जल्द से जल्द रिहा करने और स्वदेश भेजने की मांग रखी है। इस संदर्भ में, पाकिस्तान को 2 भारतीय नागरिक कैदियों और 356 भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए कहा है। सरकार ने रिहाई की प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील भी की है। इन कैदियों की नागरिकता की पुष्टि भारत सरकार द्वारा की गई है और पाकिस्तान को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। इसके अलावा, पाकिस्तान को 182 भारतीय मछुआरों और 17 नागरिक कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस प्रदान करने के लिए कहा गया है। जो पाकिस्तान की हिरासत में हैं और माना जाता है कि वे भारतीय हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय सरकार ने पाकिस्तान से चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम के सदस्यों को वीजा देने में तेजी लाने का भी अनुरोध किया है। ताकि भारतीय कैदियों की मानसिक स्थिति का आकलन करने के लिए उनकी पाकिस्तान यात्रा संभव हो सके। साथ ही संयुक्त न्यायिक समिति के शीघ्र पाकिस्तान दौरे का आयोजन करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।