नए अवसर और संभावनाएं के साथ अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों में इस वर्ष हो सकती है व्यापक वृद्धि

 

अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्रों में इस वर्ष हो सकती है व्यापक वृद्धि। प्रतीकात्मक

अर्थव्यवस्था के लिहाज से बीते दो वर्ष ठीक नहीं रहे हैं। परंतु इस बीच सरकार के तमाम प्रयासों से यह उम्मीद जगी है कि इस वर्ष 2022 के आर्थिक क्षेत्र में तमाम नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

 कोरोना महामारी के खत्म होते दौर में विश्व की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही थी। परंतु आगे यह रफ्तार लेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि महामारी पर नियंत्रण कितना प्रभावशाली होता है। प्रारंभिक अनुमान से तो ऐसा लगता है कि पहले जैसी लाकडाउन की स्थिति नहीं होगी। आंशिक लाकडाउन भले ही हो, आर्थिक गतिविधियां चलती रहेंगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत की जीडीपी में वित्त वर्ष 2022-23 में 8.5 प्रतिशत की बढ़त हो सकती है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनुमानित जीडीपी 4.9 प्रतिशत और चीन की आठ प्रतिशत से अधिक होगी। पिछले वर्ष एमएसपी के जरिये रिकार्ड खरीदारी हुई, लिहाजा महामारी काल में भी देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं हुई। गरीबी रेखा के नीचे के करोड़ों लोगों को सरकार ने मुफ्त राशन दिया। विदेश व्यापार में तेजी आई और विदेशी निवेश रिकार्ड स्तर पर पहुंचा। भारत विश्व के छह शीर्ष देशों में आ गया है जिनके पास 500 अरब डालर से अधिक विदेशी मुद्रा है।

कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षो में जो योजनाएं क्रियान्वित की हैं, जैसे कृषि सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वायल कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, विभिन्न फसलों के लिए उन्नत बीजों की व्यवस्था, बहु फसली कृषि और नकद फसलों (कैश क्राप) को बढ़ावा देना, सिंचाई योजनाओं के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का प्रविधान, रबी की फसलों की खरीद के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य में वृद्धि आदि, उनसे 2015-16 की तुलना में वर्ष 2022-23 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तो पूरा नहीं हो पाएगा, फिर भी इसमें संदेह नहीं कि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचा है, उनकी आर्थिक स्थिति और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। गांव में सड़कों और संचार व्यवस्था में भारी निवेश हुआ है। कृषि उत्पादों के निर्यात योजना के अंतर्गत 2022 में 60 अरब डालर के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।

खेती के साथ-साथ किसानों को लघु उद्योग लगाने, पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन और अन्य संबंधित उद्योगों के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत धन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसानों की आमदनी बढ़े। दूध और दुग्ध पदार्थो के उत्पादन में भारत विश्व के अग्रणी देशों में आ गया है। कृषि पदार्थो को शीघ्र दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए कृषि उड़ान योजना भी क्रियान्वित कर दी गई है जो विशेष रूप से फलों, फूलों, सब्जियों, दूध और दुग्ध पदार्थो तथा शीघ्र नष्ट होने वाले कृषि पदार्थो के निर्यात में सहायक होगी।

औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि की अच्छी संभावनाएं हैं। विभिन्न वस्तुओं की मांग बढ़ रही है, यातायात के साधन खुल गए हैं, सप्लाई चेन में जो बाधाएं थीं, वे कम हो गई हैं। पिछले वर्ष विनिर्माण में लगभग दो प्रतिशत, बिजली उत्पादन में तीन प्रतिशत एवं माइनिंग में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विदेशी पूंजी निवेश के सभी स्रोतों से निवेश बढ़ा है, शेयर बाजार में देसी निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जो 2022 में भी अर्थव्यवस्था को बल देगी। इलेक्टिक वाहनों एवं ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर, पवन ऊर्जा और सेमीकंडक्टर उत्पादन के क्षेत्र में 2022 संभावनाओं से भरा है, नई योजनाएं एवं भारी निवेश आ रहा है। स्वदेशी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए 10 अरब डालर की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है।

मुद्रास्फीति की दर में वृद्धि देश में चिंता का कारण बन रही है। थोक कीमतों का सूचकांक जो मुद्रास्फीति का मापक माना जाता है नवंबर 2021 मे 14.23 प्रतिशत पर पहुंच गया था जो पिछले तीन दशकों का रिकार्ड है। खुदरा कीमतों का सूचकांक 4.9 प्रतिशत था। कच्चा तेल, पेट्रोलियम, डीजल, गैस, टेक्सटाइल, पेपर, केमिकल्स, रबर, प्लास्टिक, धातुएं, फर्नीचर और खाद्य पदार्थ विशेष कर फल, सब्जियां, मांस, मछली, अंडे, दूध और दुग्ध पदार्थो की कीमतों में भारी वृद्धि से आम आदमी का बजट प्रभावित हुआ है। पिछले वर्ष खाद्य पदार्थो में 4.9 प्रतिशत, ऊर्जा में 39.8 प्रतिशत और कारखानों में बने माल की कीमतों में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मुद्रास्फीति की स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट को कई महीनों से स्थिर रखा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि एवं लाकडाउन में यातायात एवं सप्लाई चेन में बाधा चीजों की कीमतों मे वृद्धि के बड़े कारण थे।

कोरोना काल में उद्योग धंधे और यातायात बंद होने के कारण बेरोजगारी की स्थिति भी भयावह हो गई थी। करोड़ों की संख्या में लोग औद्योगिक शहरों से गांवों में पलायन करने को मजबूर हो गए थे। बेरोजगारी की दर 20 प्रतिशत के ऊपर चली गई थी जो नवंबर 2021 में सात प्रतिशत पर आ गई। वर्ष 2022 में बेरोजगारी की दर 6.2 प्रतिशत का अनुमार है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में पारंपरिक उद्योगों और व्यवसायों की अपेक्षा नए अवसरों की संभावनाएं कम होती हैं, तकनीकी प्रशिक्षित लोगों की मांग तो बढ़ती है, किंतु कम शिक्षित लोगों की मांग में कमी आ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए कौशल विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जिस पर सरकार जोर दे रही है।