दिल्ली के नगर निगमों को भी फंड दे केंद्र सरकार: मनीष सिसोदिया

 

केंद्र सरकार देश के अन्य नगर निगमों की तरह दिल्ली नगर निगमों को भी फंड मुहैया कराए।

उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय बजट से पहले देशभर के वित्त मंत्रियों की बैठक में कहा कि दिल्ली के निगमों पर यह जिम्मेदारी है कि वह देश की राजधानी को साफ सुथरा रखें। राजधानी किसी देश के चेहरे की तरह होती है।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश के अन्य नगर निगमों की तरह केंद्र सरकार दिल्ली के नगर निगमों को भी फंड मुहैया कराए। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय बजट से पहले देशभर के वित्त मंत्रियों की बैठक में कहा कि दिल्ली के निगमों पर यह जिम्मेदारी है कि वह देश की राजधानी को साफ सुथरा रखें। राजधानी किसी देश के चेहरे की तरह होती है, लेकिन दिल्ली के नगर निगम फंड की कमी से जूझ रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार देश के अन्य नगर निगमों की तरह दिल्ली नगर निगमों को भी फंड मुहैया कराए।

उपमुख्यमंत्री ने इस बैठक में नगर निगमों को फंड की मांग के अलावा पांच महत्वपूर्ण मांगें और भी रखीं। कोरोना के कारण हुए लाकडाउन से दिल्ली सहित सभी राज्यों की आर्थिक व्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। इसलिए केंद्र सरकार जीएसटी कंपनसेशन को आगे बढ़ाए। साथ ही पिछले 21 साल से केंद्रीय टैक्स में से दिल्ली को सिर्फ 325 करोड़ रुपये मिलता रहा है। जरूरत है कि अब केंद्र सरकार इसमें बढ़ोतरी करे। आज से 21 साल पहले सेंट्रल असिस्टेंस दिल्ली के बजट का 5.14 हुआ करता था, जो अब घटकर 0.9 प्रतिशत हो गया है।

सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली को फंड आवंटन में व्यापक विसंगतियां हैं उसे केंद्र सरकार दूर करे। दिल्ली के प्रदूषण को दूर करने के लिए केजरीवाल सरकार ई-वाहन नीति लेकर आई है। ये सफल तभी होगी जब हम ज्यादा से ज्यादा चार्जिग प्वाइंट बनाएंगे, लेकिन जमीन डीडीए के पास है। इसमें केंद्र सरकार मदद करे और डीडीए चार्जिंग प्वाइंट बनाए।

पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि पूरे देश में सैनिक स्कूल खोले जाएंगे। अगर उसमें से दिल्ली के लिए एक सैनिक स्कूल खुल जाए तो दिल्ली सरकार की ओर से उसमें जो व्यवस्थाएं होंगी दिल्ली सरकार करने के लिए तैयार है। दिल्ली की अर्थव्यवस्था देश की अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान दे रही है। 2020-21 में करंट प्राइसेस पर दिल्ली की जीएसडीपी नेशनल जीडीपी की 4.04 प्रतिशत रही है, जबकि दिल्ली की आबादी देश की आबादी की 1.49 प्रतिशत है। वहीं, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है। इसके विकास पर केंद्र सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे पहले सिसोदिया ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़े पर बढ़े टैक्स का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई थी।

उन्होंने बैठक में कहा था कि टेक्सटाइल उद्योग से देश के चार करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। इससे चार करोड़ परिवार चल रहे हैं। इस उद्योग में जाब की प्रचुर संभावनाएं हैं। रोटी, कपड़ा और मकान हर एक इंसान की सबसे पहली जरूरत होती है। इसलिए टेक्सटाइल उद्योग के लिए कोई भी नीति बनाते समय नीति आयोग को आम आदमी का ध्यान रखना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केजरीवाल सरकार आम आदमी के साथ हर कदम पर खड़ी है। आम आदमी के खिलाफ लिए गए किसी भी निर्णय का हम हमेशा जोरदार विरोध करेंगे।

केंद्र सरकार को नीतियां बनाते समय इस बात पर विचार करना चाहिए कि कपड़े पर जो भी जीएसटी लगाएंगे उसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। वर्तमान में 1000 रुपये प्रति पीस तक की बिक्री पर पांच प्रतिशत कर लगाया जाता है, लेकिन सरकार ने आने वाले वर्ष में इसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।

सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार को उन नीतियों और रणनीति पर काम करना चाहिए, जिससे भविष्य में कपड़ा निर्यात बढ़े। फिलहाल 5500 करोड़ रुपये के भारतीय घरेलू वस्त्र उद्योग का विदेश में निर्यात 60 प्रतिशत है।