गन्ने की पौध से निकला महिलाओं की तरक्की का रास्ता, पढ़ें कैसे महिलाएं अपने पैरों पर खड़े होकर घर को संवार रहीं

 

जिले में 270 महिलाओं को मिला रोजगार, साल में दो बार पौध तैयार करके कमा रही लाखों

 गन्ना अब सिर्फ किसानों की आमदनी का जरिया नहीं रह गया है बल्कि इससे महिलाएं भी मालामाल हो रही हैं। महिलाएं साल में दो बार गन्ने की पौध तैयार करके बेच रही हैं जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

रामपुर : गन्ना अब सिर्फ किसानों की आमदनी का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि इससे महिलाएं भी मालामाल हो रही हैं। महिलाएं साल में दो बार गन्ने की पौध तैयार करके बेच रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन कार्यक्रम के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना विभाग ने योजना चलाई है।

इसके तहत महिला समूह बनाकर सिंगल बड विधि और बड चिप विधि से गन्ने की नर्सरी तैयार करती हैं। इस तरह उत्पादित नर्सरी में गन्ने की प्रत्येक पौध पर सिंगल बड विधि से 1.30 रुपये और बड चिप विधि से 1.50 रुपये का अनुदान गन्ना विकास विभाग द्वारा दिया जा रहा है। इससे जहां महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं, वहीं इस विधि में बीज कम लगने एवं शत प्रतिशत जमाव होने से नवीन गन्ना प्रजातियों का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। 

में दो बार तैयार होती है पौधः ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक साहब सिंह सत्यार्थी ने बताया कि हमने स्वार क्षेत्र में नौ महिलाओं के समूह बनाए हैं। प्रत्येक समूह में 30 महिलाओं को जोड़ा गया है। इन समूह से जुड़ी महिलाएं साल में दो बार पौध तैयार करती हैं। पहली बसंतकालीन होती है, जिसमें फरवरी से मार्च तक पौध तैयार की जाती है। दूसरी शरदकालीन, जिसमें सितंबर से अक्टूबर तक पौध तैयार होती है। पिछले साल शरदकालीन में नौ समूह की 270 महिलाओं ने मिलकर 5.60 लाख पौधे तैयार किए थे। इसका गन्ना विभाग द्वारा 7.28 लाख रुपये का भुगतान बना है। इसमें सबसे ज्यादा आय ममतामयी स्वयं सहायता समूह ने की। इस समूह द्वारा 75 हजार पौध तैयार की, जिसका 1.99 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। इसी तरह मातृ शक्ति समूह ने 1.69 लाख रुपये की आय दो माह में की है।

ऐसे तैयार की जाती है पौधः गन्ने की नई प्रजाति की पौध तैयार करने के लिए आठ से नौ माह की स्वस्थ एवं कीट रहित गन्ना फसल से नर्सरी तैयार करने के लिए गन्ने का चुनाव किया जाता है। इस गन्ने से बड चिप निकालते हुए पोर ट्रे में बोआई से पहले गन्ने को उपचारित किया जाता है। बाद में इससे पोर ट्रे के खांचों में बालू व मिट्टी के साथ सही अनुपात में कार्बनिक खाद मिलाकर नर्सरी तैयार की जाती है।