ओमिक्रोन की चपेट में दुनियाभर के कई देश, आंकड़ों से जानें कैसे हैं हालात

 

टीके की दोनों डोज ले चुके लोगों में भी संक्रमण (फोटो : दैनिक जागरण)

दक्षिण अफ्रीका में जून-जुलाई 2021 में तीसरी लहर आई थी। आठ जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में औसत दैनिक मामले 20076 के पीक तक पहुंचे थे। जाहिर है कि चौथी लहर में पीक इससे ऊपर निकल गया। इसके बावजूद इस बार जान गंवाने वालों की संख्या बहुत कम है।

नई दिल्ली। ओमिक्रोन वैरिएंट के चलते भारत में एक बार फिर कोरोना के दैनिक संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। वैसे तो अभी यहां मामले उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं कि दूसरी लहर से इनकी तुलना की जा सके, लेकिन ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के आंकड़े ओमिक्रोन से जुड़ी तस्वीर को काफी हद तक साफ कर रहे हैं। इनके आंकड़े बताते हैं कि ओमिक्रोन बहुत तेजी से फैल तो रहा है, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने और जान जाने के मामले दूसरी लहर की तुलना में बहुत कम हैं।

दक्षिण अफ्रीका में बीत गया पीक

दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना में नवंबर के दूसरे हफ्ते में ओमिक्रोन का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद से ही मामलों में वृद्धि का सिलसिला शुरू हुआ और दक्षिण अफ्रीका चौथी लहर की चपेट में आ गया। 18 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में औसत दैनिक संक्रमण के मामले 23,437 पर पहुंच गए थे। इसके बाद से फिर गिरावट शुरू हो गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पीक बीत गया है।

दक्षिण अफ्रीका में जून-जुलाई, 2021 में तीसरी लहर आई थी। आठ जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में औसत दैनिक मामले 20,076 के पीक तक पहुंचे थे। जाहिर है कि चौथी लहर में पीक इससे ऊपर निकल गया। इसके बावजूद इस बार जान गंवाने वालों की संख्या बहुत कम है। यह राहत देने वाली बात है। तीसरी लहर में अस्पताल में भर्ती होने वालों का साप्ताहिक औसत कई दिन तक 10 हजार से ऊपर रहा था। इस बार यह लगभग नौ हजार तक गया और फिर गिरावट आने लगी। मौत के आंकड़े भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रहे हैं।

jagran

दक्षिण अफ्रीका में रोजाना नए मामले

jagran

अस्पताल व आइसीयू में भर्ती होने और जान गंवाने वालों की संख्या में कमी

jagran

मामलों में तेज उछाल के बावजूद ब्रिटेन में अस्पताल व आइसीयू में भर्ती होने वालों की संख्या पिछली लहर के मुकाबले कम रही। ओमिक्रोन के संक्रमण के साथ फैली मौजूदा लहर में कोरोना के कारण जान गंवाने वालों की संख्या भी पूरे ब्रिटेन में अपेक्षाकृत कम रही है। पिछली लहर की तुलना में इस बार वेंटिलेशन पर जाने वालों और जान गंवाने वालों की संख्या आधे से भी कम रही। यह दिखाता है कि ओमिक्रोन बहुत संक्रामक होते हुए भी घातक सिद्ध नहीं हुआ है।