जानिए देहरादून की राजपुर रोड सीट के बारे में, अनुसूचित जाति के लिए है ये आरक्षित

 

देहरादून जिले की यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है।

 देहरादून जिले की यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। यह सीट वर्ष 2008 में हुए परिसीमन से अस्तित्व में आई। इससे पहले यह सीट राजपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ती थी और सामान्य श्रेणी में थी।

 संवाददाता, देहरादून। देहरादून जिले की यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। यह सीट वर्ष 2008 में हुए परिसीमन से अस्तित्व में आई। इससे पहले यह सीट राजपुर विधानसभा क्षेत्र में पड़ती थी और सामान्य श्रेणी में थी। उत्तर में बन्नू स्कूल से दक्षिण में दिलाराम बाजार तक फैली इस सीट के अंतर्गत घंटाघर, करनपुर, राजपुर रोड, दिलाराम बाजार, सहारनपुर रोड, प्रिंस चौक आदि क्षेत्र आते हैं। इस सीट का नंबर 20 है।

इसलिए है खास

इस विधानसभा क्षेत्र में कई वीआइपी इलाकों के साथ 17 से अधिक मलिन बस्तियां भी आती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि कुल मतदाताओं में से करीब 55 प्रतिशत इन्हीं मलिन बस्तियों में निवास करते हैं। चुनाव में मतदाता के रूप में इसी वर्ग की सहभागिता सबसे ज्यादा देखी जाती है। इस लिहाज से इन मलिन बस्तियों के मतदाता ही प्रत्याशियों की जीत और हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

राजनीतिक इतिहास

इस सीट पर अब तक भाजपा और कांग्रेस में लड़ाई देखने को मिली है। परिसीमन से पहले वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में (तब राजपुर सीट) यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट जीते थे। अगले चुनाव (वर्ष 2007) में भाजपा के प्रत्याशी गणेश जोशी इस सीट से विधायक बने। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में कांग्रेस के राजकुमार और 2017 में भाजपा के खजानदास विधायक बने।

सामाजिक समीकरण

इस सीट पर करीब 59 प्रतिशत मतदाता अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। यही मतदाता चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं। बाकी के 41 प्रतिशत मतदाता ब्राह्मण, राजपूत व अन्य वर्ग के हैं। इस सीट पर मतदाता के रूप में व्यापारी वर्ग भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दफा यहां करीब 1,18,947 मतदाता तय करेंगे कि आगामी विधानसभा चुनाव में किसे सरताज बनाना है।

मत व्यवहार

यहां किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा। मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने और इन बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली को प्राथमिकता देने वाली पार्टी पहली पसंद बनती है।