कल रात 12 बजे से वृंदावन में होगी वाहनों की नो एंट्री, ये रहेगा तीन दिन तक रूट प्लान

 

रंगभरनी एकादशी से पहले ही वृंदावन में प्रतिबंधित रहेंगे वाहन

Holi 2022 12 की रात से शहर में वाहनों की होगी नो एंट्री। रंगभरनी एकादशी से पहले ही शहर में प्रतिबंधित रहेंगे वाहन। 15 मार्च की सुबह तक शहर में चार पहिया वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है।

आगरा। रंगभरनी एकादशी पर ठा. बांकेबिहारी मंदिर में रंगों की होली आरंभ होगी। ऐसे में देश दुनिया से लाखों श्रद्धालु वृंदावन में डेरा डालेंगे। बरसाना की होली में आने वाले श्रद्धालु भी वृंदावन का रुख कर लेंगे। ऐसे में शहर में यातायात व्यवस्था दुरस्त रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने 12 मार्च की रात से 15 मार्च की सुबह तक शहर में चार पहिया वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है।

रंगभरनी एकादशी पर यातयात व्यवस्था काबू में रखने के लिए लिए निर्णय की जानकारी देते हुए कोतवाली प्रभारी अजय कौशल ने बताया 12 मार्च शनिवार की शाम से से यह व्यवस्था लागू होगी। नई व्यवस्था में राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर से वृंदावन आने वाले बड़े वाहन छटीकरा मार्ग पर रुक्मिणी विहार पार्किंग पर रोका जाएगा। जैंत वाले नए रोड से आने वाले वाहनों को छह शिखर मंदिर के समीप और गांव सुनरख मोड़ पर ही रोक दिया जाएगा। मथुरा से आने वाले बड़े और चार पहिया वाहन पागल बाबा के समीप जिला संयुक्त चिकित्सालय के सामने पार्किंग में, जबकि यमुना एक्सप्रेसवे की ओर से आने वाले बड़े वाहन दारुक पार्किंग में खड़े कराए जाएंगे।

ब्रज के मंदिरों में बिखर रहा गुलाल

ब्रज में होली उल्लासपूर्वक मनाई जा रही है। कहा जाता है अगर राधाकृष्ण के प्रेम के प्रतीक के रंग भक्तों पर होते हैं, तो इसे राधा कृष्ण के प्रेम के समान माना जाता है और ब्रज में, रंग गुलाल बड़े उत्साह के साथ उड़ाया जा रहा है और हर कोई ठाकुरजी के प्रासदी गुलाल में सराबोर नजर आ रहा है। फुलेरा दूज से राधा वल्लभ मंदिर में शुरू हुई गुलाल की होली का आनंद लूटने के लिए भक्त आ रहे हैं। मंदिर में होली का रंग बरस रहा है। भक्त भी ठाकुरजी की दिव्य होली के साक्षी बनने के लिए मंदिर आ रहे हैं। गुरुवार को ठा. राधावल्लभ लाल ने भक्तों के साथ गुलाल की होली खेली। ठाकुरजी का प्रसादी गुलाल पाकर भक्तों की खुशी का ठिकाना ना रहा। श्रृंगार आरती के बाद ठा. राधावल्लभ लाल ने कमर में फेंटा बांधकर भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर में होली के रसिया और समाज गायन वातावरण को और भी रंगीन बन रहा था। सेवायतों ने ठाकुरजी के कपोल (गाल) पर गुलाल लगाकर उसे प्रसादी किया। कपोलों पर गुलाल लगाने के साथ मंदिर में होली गायन के मध्य गुलाल से होली खेलने की शुरुआत हो गई। सेवायतों ने ठाकुरजी का प्रसाद भक्तों पर लुटाया। देश के कोने-कोने से आए भक्त भी ठाकुरजी के प्रसादी को पाकर धन्य हुए। गुलाल में रंगकर भक्त नृत्य करने लगे। मंदिर प्रांगण ठाकुर राधावल्लभ के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था।