ईंट-भट्टा मजदूर को मिला 1.37 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस, जानें-क्या है मामला

 

ईंट-भट्टा मजदूर को मिला 1.37 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस, जानें-क्या है मामला। फोटो जागरण

Rajasthan पुखराज प्रजापत ने आरोप लगाया कि उसके नाम से पैन कार्ड बनवाकर बैंक में खाता खोला गया और फिर कंपनी बनाकर लगभग 50 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया जबकि वो ईंट-भट्टे पर मजदूरी कर जैसे-तैसे अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहा है।

अजमेर, संवाद सूत्र। राजस्थान में अजमेर के मसूदा क्षेत्र के बिजयनगर शहर के एक ईंट-भट्टा मजदूर को इनकम टैक्स का जब नोटिस आया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पुखराज प्रजापत ने आरोप लगाया कि उसके नाम से पैन कार्ड बनवाकर बैंक में खाता खोला गया और फिर कंपनी बनाकर लगभग 50 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, जबकि वो ईंट-भट्टे पर मजदूरी कर जैसे-तैसे अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रहा है। इनकम टैक्स का नोटिस आने पर पुखराज प्रजापत ने पुलिस में एक रिपोर्ट दी और बताया की वो ईंट-भट्टे पर मजदूरी करता है और अनपढ़ व्यक्ति है। उसका पैन कार्ड करीब 10 से 12 वर्ष पूर्व बना हुआ है। उसे आयकर विभाग ब्यावर से एक नोटिस मिला है, उस नोटिस में विगत साल 2013-14 के दौरान कार्तिक ट्रेडिंग कंपनी का मालिक उसे बताया गया है और रेणुका एग्जाम प्राइवेट लिमिटेड के साथ लेनदेन किया गया है।

मामला दर्ज, जांच शुरू

बिजयनगर थानाधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। थानाधिकारी ने कहा कि पीड़ित ने बताया कि उसके नाम से लगभग 48 करोड़ 51 लाख का लेनदेन किया गया है, जिसमें मजदूर को एक करोड़ 37 लाख का आयकर विभाग से नोटिस मिला है। पुलिस के मुताबिक जांच जारी है। इधर, पुखराज प्रजापत और उसके परिवार की नींद उड़ी हुई है।

गौरतलब है कि साल, 2018 में अलवर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था। यहां एक चाय की दुकान चलाने वाले को आयकर विभाग ने 20 लाख 96 हजार 100 रुपये के लेनदेन के बारे में नोटिस भेजा है। नोटिस मिलने के बाद पीड़ित चाय का दुकानदार आयकर विभाग का चक्कर लगाने को मजबूर है। मामला अलवर जिले के मालाखेड़ा इलाके के मोहब्बतपुर गांव का है। गांव में चाय की दुकान चलाने वाले सियाराम चौधरी नाम के एक व्यक्ति से आयकर विभाग द्वारा वर्ष 2010 में उसके खाते से हुए करीब 21 लाख रुपये के लेनदेन के मामले में जानकारी मांगी गई है। सियाराम चौधरी ने बताया कि वह कस्बे के बस स्टैंड पर चाय की दुकान चलाता है। उसने कभी बैंक से एक लाख रुपये तक का लेनदेन किया ही नहीं है, फिर भी उसके खाते से लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन की बात कही जा रही है।

पीड़ित ने बैंक जाकर जब इस मामले की जानकारी ली तो पता चला कि 31 दिसंबर, 2010 को उसके बैंक खाते में पांच लाख, सात लाख और आठ लाख की राशि जमा कराई गई थी। इसके बाद अगले ही दिन एक जनवरी, 2011 को एक साथ 20 लाख रुपये निकाल भी लिए गए। इसकी भनक सियाराम को आज तक नहीं लगी थी। पीड़ित का आरोप है कि उसके खाते में बैंककर्मियों की मिलीभगत से यह लेनदेन हुआ है। पीड़ित के मुताबिक, पिछले पांच साल से उसका खाता बंद पड़ा हुआ है, पहले भी उसके खाते में कभी एक लाख रुपये से ज्यादा नहींं रहे थे।