दिल्ली के इन 15 अस्पतालों की बदल जाएगी तस्वीर, बढ़ेंगी ये सुविधाएं



अस्पताल अगले साल 1241 बेड की क्षमता के साथ काम शुरू कर देगा।

योजना के तहत 22 मंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें 1500 बेड के साथ मात्र एवं शिशु चिकित्सा संबंधी सभी सुविधाएं एक ही इमारत में उपलब्ध होंगी। इस साल नवंबर तक इसका काम पूरा होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दिल्ली सरकार द्वारा अगले वित्तीय वर्ष के बजट में अस्पतालों के लिए 1900 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। यह पैसा चार नए निर्माणाधीन अस्पतालों और 15 पुराने सरकारी अस्पतालों के पुनर्विकास पर खर्च किया जाएगा। बजट पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि इन अस्पतालों के बनने और पुनर्विकास होने से 16 हजार बेड बढ़ेंगे, जिससे लोगों को इलाज कराने में मदद मिलेगी। इनमें से बुराड़ी में 768 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

साथ ही यह अस्पताल कोरोना काल में 450 बेड की क्षमता के साथ काम कर चुका है। इसके साथ ही आंबेडकर नगर अस्पताल भी 200 बेड के साथ 25 जुलाई 2020 में शुरू हो चुका है। वहीं, द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। यह अस्पताल अगले साल 1241 बेड की क्षमता के साथ काम शुरू कर देगा।

इन अस्पतालों की सुधारी जाएगी दशा : 15 पुराने सरकारी अस्पतालों के पुनर्विकास में दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल लोक नायक, गुरू तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल, बाबू जगजीवन राम मेमोरियल अस्पताल, भगवान महावीर अस्पताल, गोविंद बल्लभ (जीबी) पंत अस्पताल, आंबेडकर अस्पताल और लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) अस्पताल भी शामिल हैं। इनमें से लोकनायक अस्पताल में पुनर्विकास योजना के तहत अक्टूबर 2020 में नए मात्र एवं शिशु ब्लाक का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके तहत 22 मंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें 1500 बेड के साथ मात्र एवं शिशु चिकित्सा संबंधी सभी सुविधाएं एक ही इमारत में उपलब्ध होंगी। इस साल नवंबर तक इसका काम पूरा होने की उम्मीद है।

हजार बेड बढ़ेंगे नए अस्पताल बनने व पुरानों के पुनर्विकास से

50 करोड़ रुपये दिल्ली आरोग्य कोष के लिए बजट में दिल्ली आरोग्य कोष के तहत निश्शुल्क उपचार, सर्जरी, रेडियोलाजी एवं अन्य क्लीनिकल सेवाएं उन मरीजों को निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिन्हें कई कारणों से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलना संभव नहीं हो पाता है। इस योजना के लिए बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।