आमजन को कोविड-19 से बचाव के लिए जरूरी नियमों का पालन करने की बढ़ी जिम्मेदारी

 

ध्यान में रखना होगा कि केरल सबसे कम टीके वाले पांच राज्यों में शामिल है।

विशेषज्ञ भारत में कोरोना की चौथी लहर की आशंका बेहद कम जता रहे हैं। अब जब देशभर में कोरोना से बचाव से संबंधित लगाई गईं पाबंदियां खत्म करने का एलान कर दिया गया है तब स्थानीय प्रशासन और जनता की जबावदेही और भी बढ़ गई है।

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में लगातार गिरावट को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रलय ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए लगाई गईं सभी पाबंदियों को 31 मार्च से खत्म करने का एलान किया है। दो साल पहले देश में कोरोना की वजह से 24 मार्च, 2020 को पहली बार 21 दिनों का लाकडाउन लगा था। अब ठीक दो साल बाद देश की जनता को पाबंदियों से निजात दिलाने की घोषणा की गई है। हालांकि दो गज की दूरी और मास्क लगाने वाले नियमों का पालन पहले की तरह ही करना होगा। उसमें कोई छूट नहीं दी गई है। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों को पत्र लिखकर कहा है कि अगर कोरोना की साप्ताहिक संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक हो जाए और अस्पतालों में 40 प्रतिशत बेड भर जाएं तो ऐसे में राज्य अपने यहां कोरोना संबंधी सभी प्रतिबंध फिर से लागू कर सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने जनता को बंदिशों से आजादी दिलाने का फैसला ऐसे वक्त पर लिया है जब चीन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, फ्रांस और जर्मनी में ओमिक्रान-2 के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि भारत सरकार इन देशों से आ रही ऐसी खबरों से अनजान है। दरअसल बीते 24 महीनों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए देश ने कई तरह की क्षमताएं विकसित कर ली हैं। इनमें निगरानी, कांटेक्ट ट्रेसिंग, इलाज, टीकाकरण, अस्पताल, आक्सीजन प्लांट आदि का विकास शामिल हैं।

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देश में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी, 2020 को सामने आया था। उसके बाद संक्रमण ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया था। इस महामारी ने हमें यह सिखाया है कि किसी की परवाह करना और सेवा करना मानव धर्म है। इससे मानवीय रिश्ते मजबूत होते हैं। इसने वैक्सीन बनाने की रफ्तार में तेजी लाने का दबाव भी बनाया। विज्ञानियों ने लोगों की जान बचाने के लिए कई तरह के किफायती चिकित्सकीय उपकरणों का निर्माण किया। बहरहाल इन सवा दो वर्षो में कोविड-19 का मुकाबला करने में भारत ने जो सफलता हासिल की है, उसकी प्रशंसा दुनियाभर में हो रही है। हाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. मनसुख मांडविया ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की कोविड-19 प्रबंधन की कहानी नेतृत्व, नवोन्मेष, समर्पण, भागीदारी, साङोदारी एवं प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की कहानी है। जब यह महामारी देश में फैल रही थी, उस समय कई अध्ययनों ने भारत में इसके प्रभाव को लेकर अतार्किक अनुमान लगाए थे, लेकिन देश के राजनीतिक नेतृत्व ने संकट की उस घड़ी में निर्णायक कदम उठाए। कोरोना का मुकाबला करने के लिए बनाई गई रणनीतियों में विश्व की बेहतरीन कार्यप्रणालियों को भी शामिल किया गया।

गौरतलब है कि देश में इस समय कोविड-19 रोधी वैक्सीन की एक अरब 81 करोड़ से अधिक डोज लग चुकी हैं। मुल्क में करीब 90 प्रतिशत से अधिक वयस्क आबादी को टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं। जब भारत में टीकाकरण की बात होती तो विशेषज्ञ कहते कि देश को इसमें करीब दस साल लग जाएंगे, लेकिन हमने 14 महीनों के अंदर ही कोविड-19 रोधी टीकाकरण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर एक बार फिर आलोचकों को गलत साबित कर दिया है। यह दुनिया का सबसे सफल टीकाकरण अभियान है।

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इससे पहले पोलियो उन्मूलन के संदर्भ में भी भारत की क्षमताओं को कमतर आंका गया था, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। यहां याद रखना जरूरी है कि पोलियो उन्मूलन अभियान में भी अफवाहों के जरिये कई रुकावटें खड़ी की गई थीं। कोविड-19 रोधी वैक्सीन को लेकर भी भ्रामक सूचनाएं फैलाई गईं। इन भ्रामक सूचनाओं के बारे में आमजन को जागरूक करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय ने एक विशेष टीम बनाई। विशेषज्ञों की यह टीम ऐसी किसी भी भ्रामक सूचनाओं की सच्चाई जनता के सामने रखती है। देश में वैक्सीन विरोधी माहौल नहीं पनपे इसके लिए केंद्र सरकार ने बहुत मेहनत की है। 32.80 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रवाले भारत जैसे विशाल देश में कोविड-19 रोधी टीकाकरण को गति प्रदान करना एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया। भारत के प्रयासों से एक चीज साफ है कि केवल सार्वभौमिक टीकाकरण और अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था ही कोविड-19 को खत्म नहीं कर सकते हैं। इसके लिए आमजन और समाज के व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है। लिहाजा जनता को कोविड-19 से बचाव के लिए जरूरी नियमों का पालन करते रहना होगा। इसके लिए सरकार को भी जागरूकता अभियान जारी रखना चाहिए।