जम्मू-कश्मीर में सीमापार से घुसपैठ में आई कमी, 2018 के बाद से कुल 366 घटनाएं हुई दर्ज, सरकार ने लोकसभा में दी जानकारी

 

जम्मू-कश्मीर में सीमापार से घुसपैठ पर गृह राज्यमंत्री ने दी जानकारी (एएनआई)

नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि 2018 के बाद से जम्मू-कश्मीर में सीमापार से घुसपैठ में कमी आई है। घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है। साल 2018 से 2021 के बीच कुल 366 घुसपैठ के मामले सामने आए हैं।

नई दिल्ली, एएनआई: केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर में 2018 से नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठ में काफी कमी आई है। एक अनुमान के मुताबिक 2018 से 2021 के बीच करीब 366 घुसपैठ की वारदातों के बारे में जानकारी मिली है।  

2018 के बाद से घटी घुसपैठ की घटनाएं

यह जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सांसद रंजनबेन धनंजय भट्ट को एक लिखित जवाब के रूप में दी है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2018 के बाद से नियंत्रण रेखा (LOC) के पार घुसपैठ में काफी कमी आई है। पिछले चार वर्षों के दौरान अनुमानित घुसपैठ की कुल 366 घटनाओं के बारे में जानकारी मिली है। साथ ही सदन में उनहोंने बताया कि, प्राप्त जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में विभिन्न लान्च पैड पर बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकवादी मौजूद हैं।

घुसपैठ रोकने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया 

राय ने घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार द्वारा की जा रही कोशिशों की जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा पर बहु-स्तरीय तैनाती, सीमा पर फेंसिंग, बेहतर खुफिया और परिचालन समन्वय, सुरक्षा बलों को उच्च तकनीक के हथियारों से लैस करने समेत घुसपैठिए के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।

11 हजार के ज्यादा पदों पर हुई नियुक्तियां

मंगलवार को सदन की कार्रवाई के दौरान सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35-ए के निरस्त होने के बाद से कुल 11,324 राजपत्रित, अराजपत्रित और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह जानकारी नित्यानंद राय ने भाजपा नेता गोपाल चिन्नया शेट्टी द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब के रूप में दिया है। शेट्टी के सवाल का जवाब देते हुए राय ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार ने अगस्त 2019 से कई कदम उठाए हैं।