साल 2024 में भी बहुत खराब रहेगी दिल्ली की हवा, पढ़िए सफर इंडिया के पूर्व परियोजना निदेशक का पूर्वानुमान

 

वायु प्रदूषण, यानी एयरोसोल अब स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रकृति को भी प्रभावित कर रहे हैं।

सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि वाहनों की बढ़ती संख्या और पुराने वाहन दोनों हवा में जहर घोल रहे हैं। दिल्ली की सड़कों पर 97 प्रतिशत जगह वाहन ही घेर रहे हैं।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। सफर इंडिया के पूर्व परियोजना निदेशक डा. गुरफान बेग ने वायु प्रदूषण की दिनोंदिन गहराती समस्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यूं तो पूरे देश में यह समस्या विकराल रूप ले रही है, लेकिन उत्तर भारत इससे सर्वाधिक प्रभावित है। वर्ष 2015 के बाद तो प्रदूषण के स्तर में और तेजी से वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन, चरम मौसमी घटनाएं और भौगोलिक परिस्थितियां समस्या को और बढ़ा रही हैं।

डा. बेग सोमवार शाम लोधी रोड स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आइआइसी) में ‘वायु प्रदूषण : प्रभाव और निवारण’ विषय पर आयोजित आइआइसी स्वर्ण जयंती व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की स्थिति में आने वाले वर्षो में भी बहुत सुधार होने की उम्मीद नहीं है। अभी दिल्ली में पीएम 2.5 का सालाना स्तर 170 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहता है, जबकि वर्ष 2024 में थोड़ा कम होकर 128 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाएगा, लेकिन श्रेणी बहुत खराब ही बनी रहेगी।

आइआइटी कानपुर में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. एसएन त्रिपाठी ने कहा कि वायु प्रदूषण, यानी एयरोसोल अब स्वास्थ्य के साथ-साथ प्रकृति को भी प्रभावित कर रहे हैं। मानसून चक्र बदल रहा है तो ग्लेशियर भी तेजी से पिघल रहे हैं। हैरत की बात यह कि शहरों के बाद अब गांवों में भी हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। कुछ प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अभी बहुत प्रयास करने की जरूरत है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. शिंजिनी भटनागर ने बताया कि वायु प्रदूषण बच्चों पर ही नहीं, भ्रूण के विकास पर भी नकारात्मक असर डाल रहा है। 40 से 42 प्रतिशत बच्चे सामान्य से कम वजन के साथ जन्म लेते हैं।

उनका रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और बहुत से बच्चे तथा भ्रूण तो बच भी नहीं पाते। वहीं, सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि वाहनों की बढ़ती संख्या और पुराने वाहन, दोनों हवा में जहर घोल रहे हैं। दिल्ली की सड़कों पर 97 प्रतिशत जगह वाहन ही घेर रहे हैं।

उन्होंने स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और निर्माण नीति बनाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि पर्यावरण संरक्षण और राजनीति साथ-साथ नहीं हो सकती। इस व्याख्यान में सूत्रधार का दायित्व आइआइसी के आजीवन ट्रस्टी शैलेश नायक ने संभाला।