सिरसा जिले के लोगों में वन्य प्राणियों को बचाने का जुनून, अब तक 250 की बचा चुके जान

 

सिरसा में वन्‍य जीवों को बचाने के लिए कुछ लोग प्रयासरत हैं

वन्य प्राणी विभाग के पास 100 से ज्यादा ऐसे लोगों की सूची है जो जान पर खेलकर वन्य प्राणियों को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। विभाग के निरीक्षक का कहना है गार्ड एक चालक के तौर पर महज तीन मुलाजिमों के कंधों पर पूरे जिले का भार है।

 डबवाली। हरियाणा के अंतिम छोर पर स्थित सिरसा जिला में वन्य प्राणियों को बचाने के लिए आमजन महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। वन्य प्राणी विभाग के पास 100 से ज्यादा ऐसे लोगों की सूची है जो जान पर खेलकर वन्य प्राणियों को संरक्षण देने का काम कर रहे है। अन्यथा यहां भी वन्य प्राणी विलुप्त हो जाते। विभाग के निरीक्षक परमजीत सिंह का कहना है कि गार्ड, एक चालक के तौर पर महज तीन मुलाजिमों के कंधों पर पूरे जिले का भार है। ऐसे में उक्त लोग विभाग के लिए सहारा बने हुए है। जब भी कहीं वन्य प्राणी खतरे में होता है तो उक्त वालंटियर्स उसे बचाने पहुंच जाते है।

--लखुआना में वन्य प्राणियों के रक्षक बने हैं युवा

लखुआना गांव में वन्य प्राणियों को बचाने में आजाद युवा क्लब सराहनीय कार्य कर रहा है। शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। जब युवा शिकारियों से भिड़ गए थे। दर्जन भर से ज्यादा शिकार के मामलों को रोक पाने में युवा सफल हुए है। गांव से पास बहने वाली भाखड़ा नहर में गिरे 100 से ज्यादा नील गाय एवं अन्य जंगली जानवरों को बचा चुके है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए सार्वजनिक जगह पर करीब चार हजार से ज्यादा पौधे लगा चुके है। क्लब सदस्य रमन के मुताबिक टीम में करीब 100 युवा शामिल है। जो भाखड़ा नहर में गिरे जानवरों को बचाने के लिए नहर में कूदने से गुरेज नहीं करते है।

---हिरण बचाकर आनंद को मिलता है आनंद

चौटाला गांव में राजस्थान सीमा पर स्थित ढाणी में रहने वाले आनंद बिश्नोई करीब 15 सालों से हिरण बचाने में लगे है। करीब 250 से ज्यादा हिरण तथा नील गाय बचा चुके है। वर्ष 2007-08 में उन्होंने देखा कि एक हिरण को कुत्तों ने घेर रखा है। उसने हिरण को कुत्तो ंसे बचाया। फिर साइकिल पर छह किलोमीटर दूर आसाखेड़ा गांव में उपचार के लिए लेकर पहुंचा। खून अधिक बहने के कारण हिरण की मौत हो गई थी। वन्य प्राणी को इस तरह मरता देखा नहीं गया। वन्य प्राणियों को बचाने का जुनून पैदा हो गया। चौटाला गांव निवासी विनोद भांभू के साथ मिलकर वन्य प्राणियों को बचाने का अभियान छेड़ दिया। आनंद के मुताबिक हर वर्ष दो दर्जन से ज्यादा मामले सामने आते है। सभी घायलों को बचाने की कोशिश रहती है। 50 प्रतिशत से ज्यादा बचाने में सफल रहता हूं।

----विलुप्त होने की कगार पर है डिजार्ट लिजर्ड, सिरसा में मिला अनुकूल माहौल

वन्य प्राणियों की दुनिया बहुत विशाल है। बहुत से प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है। तो कुछ कगार पर पहुंच गई है। वन्य प्राणियों को बचाने में काम कर रहे लोगों की वजह से अस्तित्व बचा हुआ है। डिजार्ट लिजर्ड को ही देख लीजिए। राजस्थान, उत्तराखंड के बाद गोह की यह प्रजाति देश में सिर्फ सिरसा में नजर आई है। रेस्क्यू के बाद सुरक्षित जंगलों में छोड़ा गया है। डबवाली निवासी खुशी मोहम्मद कुरैशी ने प्रेमनगर तथा जंभेश्वर नगर में गोह की इस प्रजाति को जंगलात क्षेत्र में रिलीज किया था। सिरसा जिला में इस प्रजाति की 9 मोनिटर लिजर्ड मिली है। वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक परमजीत सिंह का कहना है कि बहुत अच्छी बात है कि विलुप्त होने की कगार पर पहुंची इस प्रजाति को सिरसा में अनुकूल माहौल मिल रहा है।