एसओएसई में दाखिले के लिए 26 से 28 मार्च तक होगी प्रवेश परीक्षा

 

एसओएसई में दाखिले के लिए 26, 27 और 28 मार्च को होगी प्रवेश परीक्षा।

शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को परिपत्र जारी कर कहा कि छात्रों के दाखिला से संबंधित प्रवेश परीक्षा परीक्षा केंद्रों पर ही आयोजित की जाएगी।निदेशालय ने परीक्षा केंद्र बनाए गए स्कूलों की सूची भी जारी कर दी है जहां पर छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दिल्ली बोर्ड आफ स्कूल एजुकेशन (डीबीएसई) से संबंधित स्कूल आफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस (एसओएसई) में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में नौवीं और 11वीं में दाखिले के लिए 26 से 28 मार्च के बीच प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को परिपत्र जारी कर कहा कि छात्रों के दाखिला से संबंधित प्रवेश परीक्षा परीक्षा केंद्रों पर ही आयोजित की जाएगी।निदेशालय ने परीक्षा केंद्र बनाए गए स्कूलों की सूची भी जारी कर दी है, जहां पर छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी। वहीं, प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने परीक्षा केंद्र को आवंटित उम्मीदवारों की संख्या के अनुसार निर्धारित परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कमरों और कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करें। 

छात्र की मौत, जेएनयू प्रशासन को घेरा

इधर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रसंघ ने जेएनयू प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। छात्रसंघ ने एक बयान जारी कर कहा कि सेंटर फार रशियन स्टडीज से पीएचडी कर रहे छात्र मयंक का सोमवार को निधन हो गया। मयंक ताप्ती छात्रवास में रहता था। मयंक ने सोमवार को सीने में तेज दर्द की शिकायत की थी। उसे जेएनयू के स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया, पर उसे तत्काल उपचार नहीं मिला। हालत खराब होने पर स्वास्थ्य केंद्र ने मयंक को एम्स रेफर कर दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले मयंक की मौत हो चुकी थी।

छात्रसंघ ने आरोप लगाया कि कुलपति शांतिश्री पंडित, यूजीसी अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार और खस्ताहाल स्वास्थ्य केंद्र इस आपराधिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि, जेएनयू के डीन आफ स्टूडेंट प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने कहा कि मयंक सीने में दर्द की शिकायत करते हुए जेएनयू डाक्टर के पास आया था। जब उसकी ईसीजी असामान्य आई तभी उसे एम्स भेजा गया। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि दिल का दौरा पड़ा। यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर मौत कैसे हुई। जेएनयू की ओर से कोई चूक नहीं हुई है।