मानवीय दखल बढ़ने से संकट में वन्यजीव, पांच साल में हिसार, फतेहाबाद, सिरसा व भिवानी में 2682 मारे गए

 

जो सांप व चूहे आपको आसानी से खेतों में दिखते थे अब उनकी संख्या में कमी आ गई है।

वन्य प्राणी जीव दिवस हिसार में वन्यजीव विभाग की ओर से किए गए एक सर्वे में सामने आई है। जिसमें पाया गया है कि मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से लेकर कई अन्य कारणों से हिसार मंडल में वन्य जीवों की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है।

 हिसार : जो सांप व चूहे आपको आसानी से खेतों में दिखते थे अब उनकी संख्या में कमी आ गई है। यही नहीं नील गाय से लेकर हिरण सहित कई वन्य जीवों की संख्या में भी 30 प्रतिशत से अधिक कमी आ गई है। यह जानकारी वन्यजीव विभाग की ओर से किए गए एक सर्वे में सामने आई है। जिसमें पाया गया है कि मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से लेकर कई अन्य कारणों से हिसार मंडल में वन्य जीवों की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। आठ फरवरी से 15 फरवरी 2022 में हुए वन्यजीव विभाग के मंडल स्तरीय सर्वे किया गया। साल 2011 के अध्ययन की तुलना में वन्य जीवों की आबादी घटी है। इसकी रिपोर्ट भारत सरकार के भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून को भेजी गई है। उस रिपोर्ट को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। बात पुरानी रिपोर्ट की करे तो एक जनवरी 2016 से लेकर 31 दिसम्बर 2020 तक पांच साल में हिसार मंडल के जिला हिसार, फतेहाबाद, सिरसा व भिवानी में कुल 2682 वन्यजीव मारे गए हैं। 

छह जिलों में हुआ सर्वे

वन्यजीव विभाग ने आठ फरवरी से 15 फरवरी तक मंडल स्तर पर वन्य जीवों का सर्वे किया गया है। सर्वे हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, भिवानी और दादरी में किया गया है। इन क्षेत्रों के अध्ययन में वन्य जीवों की आबादी में गिरावट दर्ज हुई है। सर्वे में वे वन्य जीव बढ़े स्तर पर घंटे है। जिसमें सांप, गिदड, लोमडी, नीलगाय, काला हिरण, चिंकारा, सांप, चूहे और लकड़बग्घा इत्यादि शामिल है।

अध्ययन में विभाग का तर्क इन कारणों से घटी वन्य जीवों की संख्या

- खेतों में डाले जा रहे कीटनाशक वन्य जीवों के जीवन पर खतरा बन रहे है।

- वन जगह के अभाव व खेतों में हो रही तारबंदी के कारण वन्यजीवों को विचरण के लिए जगह का अभाव है।

- बढ़ता आटो माेबाइल सेक्टर के कारण भी ध्वनि व वायु प्रदूषण भी इसकी अहम वजह में से एक है।

- आमजन की माने तो गर्मी में पानी की कम उपलब्धता भी कारण है।

- कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण वन्यजीव उनका शिकार हो रहे है।

आवारा मांसाहारी कुत्तों का निवाला बन गए सैकड़ों काले हिरण

हिसार मंडल के जिला हिसार, फतेहाबाद, सिरसा व भिवानी में कुल 2682 वन्यजीव एक जनवरी 2016 से लेकर 31 दिसम्बर 2020 तक पांच साल की अवधि में मारे गए है। ये वन्य जीव कुत्तों के कारण, शिकार, बीमारी व अन्य कारणों से मारे गए। इनमें 411 काले हिरण भी मारे गए हैं। हिसार मंडल के राजस्थान बार्डर से लगते जिलों में वन्यजीव खात्में के कगार पर है।

हिसार मंडल के किस जिले में कितने मरे वन्य जीव

हिसार मंडल : 411 कालेहिरण, 68 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 35 चिंकारा हिरण, 74 बंदर, 2005 रोज और 89 अन्य वन्यजीव यानि कुल 2682 वन्यजीव मौत का शिकार हुए।

हिसार : 216 कालेहिरण, 27 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 22 चिंकारा हिरण, 09 बंदर, 958 रोज और 41 अन्य वन्यजीव यानि कुल 1273 वन्यजीव मरे।

फतेहाबाद : 176 कालेहिरण, 24 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 02 चिंकारा हिरण, 32 बंदर, 605 रोज और 23 अन्य वन्यजीव यानि कुल 862 वन्यजीव मरे।

सिरसा : 12 कालेहिरण, 01 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 05 चिंकारा हिरण, 01 बंदर, 163 रोज और 05 अन्य वन्यजीव यानि कुल 187 वन्यजीव मरे।

भिवानी : 07 कालेहिरण, 16 राष्ट्रीय पक्षी मोर, 06 चिंकारा हिरण, 32 बंदर, 279 रोज और 20 अन्य वन्यजीव यानि कुल 360 वन्यजीव मरे।

-- -- -- हमने सरकार से मांग की हुई है कि वन्यजीवों को संरक्षण की दिशा में सरकार बड़े स्तर पर काम करें। वन्यजीव संरक्षण कानून की पालना करवाई जाए। पर्यावरण बचाया जाए।

- विनोद कड़वासरा, पदाधिकारी, अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा, हरियाणा।

-- -- फरवरी माह में वन्य जीवों का सर्वे किया गया है। जिसमें पाया है कि कई वन्य जीवों की प्रजाति की संख्या में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी पाई गई है। जिसमें नीलगाय, सांप, चूहे और हिरण इत्यादि शामिल है। हमने सर्वे रिपोर्ट भारत सरकार के भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून को भेज दी है।

- वेद प्रकाश, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी, वन्य जीव विभाग, हिसार।