सीएफईईएस ने तैयार किया 2.8 किलोग्राम वजन का विशेष फायर सेफ्टी सूट, जानें इसके फायदे

 

डीआरडीओ के सीएफईईएस सेंटर ने दमकल कर्मियों के लिए कम वजन वाला फायर सेफ्टी सूट तैयार कर दिया है।

अभी तक इस्तेमाल हो रहे फायर सेफ्टी सूट का वजन साढ़े तीन से चार किलो तक होता है। इस तरह मौजूदा सूट से यह सूट करीब डेढ़ किलो तक हल्का है। इस सूट का उत्पादन शुरू करने के लिए टेक्नोलाजी हस्तांतरित की जा रही है।

नई दिल्ली  ,surender aggarwal। आगजनी की भयावह घटना कई बार दमकल कर्मियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन जाती है। ऐसे ही जोखिम को कम करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के दिल्ली स्थित सेंटर फार फायर एक्सप्लोसिव एंड एनवायरमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस) के विज्ञानियों की टीम ने एक विशेष फायर सेफ्टी सूट तैयार किया है।

डेढ़ साल की मेहनत लाई रंंग

विज्ञानी डा. प्रसून कुमार राय ने बताया कि डीआरडीओ की ओर से हमें डेढ़ साल पहले यह काम सौंपते हुए कहा गया था कि हमारी सेनाओं और राज्य दमकल विभाग में इस्तेमाल होने वाले फायर सेफ्टी सूट विदेश से आयात होते हैं। इसलिए आयातित सूट से हल्का और अधिक सुरक्षित फायर सेफ्टी सूट तैयार करके देना है। जिसका उत्पादन भी देश में ही हो सके। इसके बाद हमारी टीम ने काम शुरू किया। इसके साथ ही सूट का वजन कम रखने के लिए इसकी सारी लेयर खुद ही अपनी तिमारपुर की प्रयोगशाला में तैयार की। इस सूट का वजन दो किलो 800 ग्राम है।

अब कितने किलाेग्राम का हुआ अंतर

अभी तक इस्तेमाल हो रहे फायर सेफ्टी सूट का वजन साढ़े तीन से चार किलो तक होता है। इस तरह मौजूदा सूट से यह सूट करीब डेढ़ किलो तक हल्का है। डा. राय ने बताया कि अभी दो स्वदेशी कंपनियां सिस्टम फाइव एस और विजय सावरे को इस सूट का उत्पादन शुरू करने के लिए टेक्नोलाजी हस्तांतरित की जा रही है। इसके बाद उत्पादन शुरू होने पर अगले दो-तीन महीने में यह सूट बाजार में आ जाएगा। इसकी कीमत कंपनियों द्वारा तय की जाएगी। लेकिन, इसकी कीमत फिलहाल जो फायर सेफ्टी सूट उपलब्ध हैं उनसे अधिक नहीं होगी।

स्वदेशी निर्मित

आग लगने के दौरान इस सूट का इस्तेमाल कर दमकलकर्मी और सैन्यकर्मी प्रभावी ढंग से अपना बचाव कर सकेंगे और आग से निपट सकेंगे। सूट की बाहरी लेयर एंटी स्टैटिक फ्लेम रिटारडेंट मैटेरियल से बनी है जो आसानी से आग नहीं पकड़ता है। वहीं, दूसरी और तीसरी लेयर में इस्तेमाल किया गया फैब्रिक नमी व थर्मल बैरियर का काम करता है। डा. प्रसून ने बताया कि स्वदेशी फायर सेफ्टी सूट तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इस पर एक-डेढ़ साल में काम पूरा हो जाएगा। अभी जो सूट बन रहे हैं उनकी लेयर और लेयर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फाइबर विदेश से आयात होकर प्रोसेस करके तैयार किया जाता है।

सेफ्टी सूट तैयार करने वाली टीम

सीएफईई के विज्ञानी डा. प्रसून कुमार राय के अलावा प्रवीन राजपूत, डा. महीपाल मीणा और राजू यादव के साथ मिलकर फायर ट्रेनिंग और प्रोटेक्टिव क्लोथिंग ग्रुप के प्रमुख डा. खेमचंद वाधवा के मार्गदर्शन में डेढ़ साल में सूट तैयार हुआ।

दिल्ली दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि आग बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को तेजी के साथ भाग दौड़ करनी होती है। जहां लिफ्ट न होने पर तेजी के साथ सीढ़ियां भी चढ़नी होती हैं। ऐसे में हल्का सेफ्टी सूट काफी आरामदायक होगा। सूट जितना हल्का होगा उतना ही दमकलकर्मियों के शरीर पर वजन कम होगा।