2 अप्रैल से बदल जाएगा गिरिराजजी के भाेग का स्वाद, भीगे बादाम और ठंडाई के साथ परोसे जाएंगे ये व्यंजन भी

 


मुकुट मुखारविंद गिरिराजजी को भोग समर्पित करते सेवायत राज कुमार शर्मा।

गिरिराजजी को गर्मी से राहत देने के लिए नवसंवत्सर से माखन मिश्री और नीम की पत्तियों के साथ खानपीन और श्रंगार में होगा बदलाव। इतना ही नहीं सलाद लस्सी और पापड़ भी होंगे भाेग में शामिल। रेशमी की जगह अब सूती पोशाक अर्पित की जाएगी।

आगरा। कहा जाता है कि ब्रज में भाव से पूजा की जाती है। यहां तीनों लोक के स्वामी केशव को लल्ला के रूप में पूजा जाता है। जैसे हम अपने किसी प्यारे बच्चे का लालन पालन करते हैं, उसका ध्यान रखते हैं उसी स्नेह भाव के साथ गोवर्धनधारी की सेवा होती है। बस भाव जो प्रमुख होता है वो है निश्छल भक्ति का। तभी तो कहते हैं कि गिरिराजजी भाव के भूखे हैं तो उनके भक्त भी बाल स्वरूप को लाढ़ कर तथा निराले ढंग से सेवा कर प्रभु को रिझाते हैं। मुकुट मुखार गिरिराजजी की खानपान और श्रंगार की सेवा में सेवायत ने बदलाव किया है।

दो अप्रैल यानी नवसंवत्सर से सुबह गाय चराने वाले बाल स्वरूप कन्हैया को गर्मी से राहत देने के लिए सेवायत सेवा की बदलाव की शुरुआत माखन मिश्री के साथ नीम की पत्ती का भोग समर्पित कर करेंगे। दो अप्रैल की भाेर से यह बदलाव किया जाएगा। सेवायत राजकुमार शर्मा के अनुसार लगातार बदलते मौसम के कारण प्रभु का सुबह दूध, दही, बूरा, शहद, मानसी गंगा का जल आदि से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। प्रभु के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सुबह माखन मिश्री के साथ नीम की पत्ती तथा पानी में भीगे बादाम समर्पित किए जाएंगे। प्रभु को रोटी सब्जी दाल चावल कढ़ी खीर तथा माखन के साथ परोसी जाएगी। प्रभु के भोग में ठंडी रबड़ी, लस्सी और पापड़ के साथ सलाद भी शामिल किया जाएगा। जिससे प्रभु का स्वास्थ्य अच्छा बना रहे, तथा गर्मी से बचाव हो सके। दोपहर में प्रभु को मेवा युक्त ठंडाई का भोग लगेगा। प्रभु के श्रंगार में हलके सूती वस्त्र तथा विभिन्न प्रजातियों के पुष्पों की कलियों का प्रयोग किया जाएगा। दोपहर के बाद प्रभु को फलों का भोग समर्पित किया जाएगा।