रूस ने यूक्रेन के सबसे बड़े मिलिट्री फ्यूल स्‍टोरेज साइट को किया तबाह, शरणार्थियों की संख्‍या 35 लाख के करीब

 

रूस ने नष्‍ट की मिलिट्री फ्यूल स्‍टोरेज साइट (एएफपी फोटो)

रूस के यूक्रेन पर हमले दूसरे माह भी चालू हैं। फिलहाल युद्ध रोकने की कोई संभावना भी बनती दिखाई नहीं दे रही है। रूस ने कहा है कि उसने हमला कर यूक्रेन के सबसे बड़े मिलिट्री फ्यूल स्‍टोरेज साइट को नष्‍ट कर दिया है।

मास्‍को (एएफपी)। रूस ने दावा किया है कि उसने यूक्रेन के सबसे बड़े मिलिट्री फ्यूट स्‍टोरेज साइट को हमले में तबाह कर दिया है। रूस ने इसको बड़ी कामयाबी बताया है। इससे पहले रूस ने यूक्रेन के मिसाइल डिपो को हमला कर नष्‍ट कर दिया है। आपको बता दें कि रूस और यूक्रेन की लड़ाई को एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान रूस ने यूक्रेन के एक बड़े भाग पर अपनी तबाही के निशान छोड़े हैं। एएफपी के मुताबिक यूक्रेन ने कहा है कि मारियूपोल में करीब एक लाख लोग बिना पानी और खाने के फंसे हुए हैं। यहां पर रूस ने जबरदस्‍त हमले किए हैं। वहीं चेचन नेता रमजान कादिरोव ने दावा किया है कि उसने यहां के सिटी हाल को अपने कंट्रोल में ले लिया है।रतलब है कि रूस ने यूक्रेन पर 24 फरवरी को हमले करना शुरू किया था। शुरुआती हमलों के लिए उसने अपने तोपखाने को मैदान में उतारा था लेकिन उसके बाद रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइल और एयर स्‍ट्राइक के जरिए यूक्रेन पर जबरदस्‍त हमले किए। इन हमलों की वजह से यूक्रेन के पड़ोसी देशों में शरणार्थियों की संख्‍या 35 लाख तक पहुंच गई है। संयुक्‍त राष्‍ट्र लगातार वहां के हालातों को लेकर चिंता जता रहा है। वहीं अमेरिका लगातार रूस को आगाह कर रहा है। हाल ही में अमेरिका ने रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।

यूक्रेन पर हमलों को देखते हुए अमेरिका के राष्‍ट्रपति इन दिनों यूरोप के दौरे पर हैं। पौलेंड और ब्रसेल्‍स के दौरे में उन्‍होंने अपने सहयोगी देशों से रूस के हमलों पर चर्चा की है। नाटो से भी अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन की बात हुई है। ये बातचीत यूक्रेन पर रूस के संभावित केमिकल और न्‍यूक्लियर अटैक की सूरत में अपने अगले कदम को लेकर थी। पौलेंड में यूक्रेन पर हमलों को देखते हुए लोगों ने एक रैली भी निकाली है। 

दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्‍ट्रपति लगातार रूस से बातचीत करने की बात कह रहे हैं। गुरुवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में रूस के खिलाफ एक प्रस्‍ताव लाया गया था। हालांकि इस प्रस्‍ताव के दौरान भारत अनुपस्थित रहा था। बता दें कि भारत शुरुआत से ही इस मुद्दे पर अपने तटस्‍थ रुख पर कायम है।